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एंबुलेंस नहीं मिली तो बाइक पर खटिया, खटिया पर मरीज; मुजफ्फरपुर में ‘सुशासन’ की कैसी तस्वीर?

Published: Wed, 12 Aug 2026 09:46 AM (IST)

मुजफ्फरपुर में एम्बुलेंस न मिलने पर एक दिव्यांग मरीज को बाइक पर खटिया बांधकर अस्पताल पहुंचाया गया, जिससे स्वास्थ्य व्यवस्था ...और पढ़ें

HighLights

  1. दिव्यांग मरीज को बाइक पर खटिया से अस्पताल ले जाया गया।

  2. एसकेएमसीएच में स्ट्रेचर-व्हीलचेयर न मिलने से मरीज परेशान।

  3. मुख्यमंत्री ग्रामीण परिवहन योजना की विफलता उजागर हुई।

केशव कुमार, मुजफ्फरपुर । सुशासन के दावों और मुख्यमंत्री ग्रामीण परिवहन योजना की हकीकत को बयां करती एक झकझोर देने वाली तस्वीर एसकेएमसीएच से सामने आई है।

यहां एक बेबस दिव्यांग मरीज को इलाज के लिए बाइक के ऊपर खटिया (चारपाई) बांधकर अस्पताल पहुंचना पड़ा। इस अमानवीय और हैरान करने वाले दृश्य को देखकर अस्पताल परिसर में लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। हर कोई स्वास्थ्य व्यवस्था और प्रशासनिक संवेदनहीनता को कोसता नजर आया।

पीड़ित मरीज हथौड़ी थाना इलाके के शाहपुर गांव का रहने वाला विनोद साह है। विनोद दिव्यांग है। कुछ समय पहले एक सड़क दुर्घटना में उसका पैर टूट गया था, जिससे वह चलने-फिरने में पूरी तरह लाचार हो गया।

वर्तमान में वह बेडशोल घाव से पीड़ित है। बेबसी का आलम यह है कि विनोद को पिछले तीन-चार महीनों से सरकार की तरफ से मिलने वाली सामाजिक सुरक्षा पेंशन भी नसीब नहीं हुई है, जिससे उसकी आर्थिक स्थिति बदहाल हो चुकी है।


हद तो तब हो गई जब इतनी मुश्किलों के बाद विनोद एसकेएमसीएच परिसर पहुंचा। वहां उसे देखने वाला या एक वार्ड से दूसरे वार्ड ले जाने वाला कोई नहीं मिला।

अस्पताल में न तो स्ट्रेचर की व्यवस्था हुई और न ही व्हीलचेयर मिली। इसके कारण वह घंटों दर्द से तड़पता हुआ परिसर में ही इधर-उधर घूमता रह गया।

कागजों पर दौड़ रही मुख्यमंत्री ग्रामीण परिवहन योजना

पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री ग्रामीण परिवहन योजना की पोल खोलती है। ग्रामीण इलाकों में मरीजों को सुरक्षित और त्वरित अस्पताल पहुंचाने के दावे के साथ सरकार ने इस योजना के तहत वाहनों की खरीद पर भारी सब्सिडी दी थी।

लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि सब्सिडी का लाभ उठाकर खरीदे गए वाहन केवल मालिकों के निजी स्वार्थ और व्यावसायिक कार्यों में आ रहे हैं। आम जनता और आपातकाल में फंसे मरीजों के लिए ये गाड़ियां आज भी पहुंच से दूर हैं।

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