मुजफ्फरपुर, {अमरेंद्र त‍िवारी}। मुजफ्फरपुर ओप्थाइमोलोजिकल सोसाइटी के सम्मेलन को संबोधित करते हुए स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने कहा कि आंख की विभिन्न बीमारियों के अत्याधुनिक इलाज की सुविधाओं के लिए आइजीआइएमएस में 178 करोड़ की लागत से 200 बेड के क्षेत्रीय नेत्रालय का निर्माण हो रहा है। इसका एक अलग लुक होगा। चारों तरफ से एक ही तरह का दिखाई देगा। इस अस्पताल के बन जाने से बिहार के नेत्र रोगियों को इलाज के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा। शनिवार देर शाम पटियासा स्थित एक होटल में आयोजित समारोह में कहा कि आंख का बेहतर से बेहतर इलाज के लिए कार्निया ट्रांसप्लांट के काम में और तेजी लाने के लिए विभिन्न मेडिकल कालेजों में यह सुविधा मिलेगी।

शरीर का सभी अंग स्वस्थ हो और आंख ठीक नहीं हो तो सब कुछ अंधेरा हो जाता है। ऐसे में नेत्र चिकित्सक लोगों को उजियारा देने वाले का काम करते हैं। दूसरे राज्य से आए चिकित्सकों को एसकेएमसीएच के पीकू अस्पताल का मुआयना करने का अनुरोध किया। पहला अस्पताल है जो आठ महीने में बनकर तैयार हो गया है और बच्चों के इलाज के लिए बेहतर से बेहतर सुविधा यहां उपलब्ध है। इससे पहले कान्फ्रेंस की शुरुआत स्वास्थ्य मंत्री के साथ डा. कमलेश तिवारी, डा. सलभ सिन्हा ने की। मौके पर एक एप व स्मारिका का विमोचन किया गया। 10 चिकित्सकों को सम्मानित किया गया। नेत्र रोग विशेषज्ञ डा. पल्लवी सिन्हा ने मंच का संचालन किया। सोसायटी का नया अध्यक्ष डा. प्रणव रंजन को बनाया गया। निवर्तमान अध्यक्ष डा. मिल‍िंद कुमार ने कार्यभार सौंपा।

इनकी रही भागीदारी

सिविल सर्जन डा.विनय कुमार शर्मा, डा. विभूति सिन्हा, डा. निलेश मोहन, डा. सत्यजीत स‍िंहा, डा. एसके पांडेय, डा. रंजन, डा. अमरेंद्र झा, डा. साहब सिन्हा, डा. परिजात, एसकेएमसीएच के अधीक्षक डा. बीएस झा, डा. पल्लवी सिन्हा आदि शामिल रहे।

नई तकनीक से आंख का इलाज हुआ हुआ सस्ता, लिक्विड क्रोनिया पर चल रहा शोध

दिल्ली के वरीय चिकित्सक डा. वीरेंद्र सांगवान ने कहा कि पहले के जमाने में आंख की सर्जरी के लिए लेबोरेट्री का होना आवश्यक होता था। अब एटेन सेल टेक्नोलाजी की नई शोध से 10 गुना इलाज सस्ता हो गया है। पहले लेबोरेटरी में आंख को ग्रो किया जाता था। अब नए शोध में आंख में ही ग्रो कर सर्जरी कर दी जाती है। इससे इलाज सस्ता हो जाता है। लिक्विड क्रोनिया पर शोध चल रहा है। आंखों में सबसे अधिक सर्जरी कार्निया की होती है। अब तक कार्निया ट्रांसप्लांट होकर दूसरे लोगों की आंख को उजाला दिया जाता है। अब नए शोध में लिक्विड कार्निया पर शोध चल रहा है।

अभी एनिमल पर ट्रायल हो रहा है। संभावना है कि अगले दो साल में लिक्विड कार्निया पर शोध पूरा हो जाएगा। इसके बाद कार्निया ट्रांसप्लांट की जरूरत नहीं पड़ेगी। लिक्विड कार्निया से ही लोगों का आंख की रोशनी लौटेगी।

डायबिटीज आंखों का रेटिना पर डाल रहा असर

कोलकाता के नेत्र रोग विशेषज्ञ डा. पार्थो विश्वास ने कहा कि कोरोना के बाद जिस तरह से लोगों को डायबिटीज हो रहा है, उससे उनके आंखों को काफी प्रभावित कर रहा है। डायबिटीज होने से मरीज का रेटिना खराब हो रहा हैं। जिन मरीजों को डायबिटीज हो गई है, उन्हें हर छह माह में एक बार अपने चेकअप कराना चाहिए। इससे उनकी आंखों पर जो असर पड़ता है, उससे बचा जा सकता हैं। अभी लेजर आपरेशन के द्वारा आंख का चश्मा भी हटाया जा रहा है।

Edited By: Dharmendra Kumar Singh