विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

Bihar News : बार-बार सिरदर्द को न करें नजरअंदाज, युवाओं में किडनी फेलियर का बन रहा संकेत

By Keshav Kumar Edited By: Dharmendra Singh
Published: Thu, 12 Mar 2026 11:03 PM (IST)

Kidney Failure Risk : मुजफ्फरपुर में नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि युवाओं में बार-बार होने वाला सिरदर्द किडनी ...और पढ़ें

इसमें प्रतीकात्मक तस्वीर लगाई गई है।

इसमें प्रतीकात्मक तस्वीर लगाई गई है।

HighLights

  1. युवाओं में सिरदर्द किडनी फेलियर का प्रारंभिक संकेत।

  2. उच्च रक्तचाप, जंक फूड किडनी को पहुंचाते हैं नुकसान।

  3. एआई-आधारित यूएसीआर टेस्ट से शीघ्र पहचान संभव।

जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर। Kidney Disease Awareness : सिरदर्द की चपेट में आ रहे युवाओं के लिए किडनी फेलियर बड़ा संकेत बन रहा है।युवा इसे स्ट्रेस मानते हुए पेनकिलर खाकर काम चला रहे।

समय रहते अपनी जांच नहीं करवा रहे, जिसके कारण अब बुजुर्गों के साथ युवा भी किडनी रोग की चपेट में आ रहे है। उक्त बातें विश्व किडनी दिवस पर नेफ्रोलाजिस्ट डा. धमेंद्र कुमार ने कहीं।

चिकित्सक ने बताया कि युवाओं में बढ़ता सिरदर्द सीधे तौर पर किडनी रोग से जुड़ा है। भागदौड़ भरी जिंदगी, जंक फूड और नींद की कमी से युवाओं में उच्च रक्तचाप तेजी से बढ़ रहा है।

यह बढ़ा हुआ दबाव किडनी की सूक्ष्म रक्त धमनियों को छलनी कर देता है, जिससे किडनी धीरे-धीरे काम करना बंद कर रही है। कहा, किडनी की बीमारी के लक्षण तब दिखते हैं जब वह 70-80 प्रतिशत खराब हो चुकी होती है।

अगर एआइ आधारित जांच से शुरुआती दौर में ही प्रोटीन लीकेज का पता चल जाए, तो दवाओं और सही खान-पान से किडनी को पूरी तरह स्वस्थ किया जा सकता है।

चिकित्सक ने स्पष्ट कहा है कि बार-बार होने वाले सिरदर्द को नजरअंदाज न करें, बीपी जरूर चेक कराएं। बिना चिकित्सक की सलाह के पेनकिलर (दर्द निवारक दवाएं) कतई न लें। साल में एक बार यूएसीआर टेस्ट और क्रिएटिनिन की जांच जरूर कराएं।

एआइ तकनीक: चिकित्सा विज्ञान में आए नए बदलावों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने अब किडनी की जांच 24 घंटे के अंदर संभव है। पहले किडनी की कार्यक्षमता जांचने के लिए मरीज को 24 घंटे का मूत्र जमा करना पड़ता था, जो काफी असुविधाजनक था।

अब एआइ आधारित यूएसीआर (यूरिन एल्ब्यूमिन-क्रिएटिनिन रेशियो) टेस्ट से यह काम मिनटों में हो जाता है। चिकित्सक ने बताया कि एक ही सैंपल जांच के लिए काफी है।

सुबह के समय लिए गए मूत्र के केवल एक नमूने से किडनी की सेहत का सटीक पता चल जाता है। यह टेस्ट मूत्र में मौजूद एल्ब्यूमिन (प्रोटीन) और क्रिएटिनिन की सूक्ष्म मात्रा को मापता है। अगर मधुमेह या बीपी के कारण किडनी में मामूली खराबी भी शुरू हुई है, तो यह तकनीक उसे पहले चरण में ही पकड़ लेती है।