मुजफ्फरपुर में मां और तीन बच्चों की मौत का रहस्य चार माह बाद भी अनसुलझा
मुजफ्फरपुर में बूढ़ी गंडक नदी से एक मां और उसके तीन बच्चों के शव मिलने के चार महीने बाद भी ...और पढ़ें

इसमें प्रतीकात्मक तस्वीर लगाई गई है। ( फोटो AI)
जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर । अहियापुर के चंदवारा पुल के नीचे 15 जनवरी को ममता कुमारी और उसके तीन मासूम बच्चों के शव मिलने के चार माह बीत जाने के बाद गुत्थी नहीं सुलझ सकी।
पुलिस विधि विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) की रिपोर्ट का हवाला देकर अपना पल्ला झाड़ रही है। मुख्य आरोपित तक पुलिस के हाथ नहीं पहुंच सके हैं, जिससे न्याय की उम्मीद लगाए बैठे स्वजन में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
विदित हो कि सिपाहपुर बखरी के रहने वाले आटो चालक कृष्णमोहन कुमार की पत्नी ममता कुमारी (22) और उनके तीन बच्चे आदित्य (6), अंकुश (4) और कीर्ति (2) बीते 10 जनवरी को घर से निकले थे। जब वे वापस नहीं लौटे, तो कृष्णमोहन ने अहियापुर थाने में अपहरण की प्राथमिकी कराई थी।
पांच दिनों बाद 15 जनवरी को चंदवारा पुल के समीप बूढ़ी गंडक नदी से चारों के शव बरामद हुए। शवों के दुपट्टे से बंधे होने के कारण मामला प्रथम दृष्टया हत्या का प्रतीत हो रहा था, लेकिन पुलिस ने इसे संदिग्ध करार देकर जांच ठप कर दी।
एफएसएल रिपोर्ट बनी पुलिस की ढाल
जांच की वर्तमान स्थिति पर एसडीपीओ टाउन-2 विनीता सिन्हा का कहना है कि पुलिस लगातार लैब के संपर्क में है। चार पर रिपोर्ट के लिए एफएसएल विभाग को रिमाइंडर दिया गया है। फिर भी रिपोर्ट अप्राप्त है।
रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि यह मामला सामूहिक आत्महत्या का था या सोची-समझी हत्या का। वर्तमान में पुलिस ने मीनापुर के मधुबनी निवासी अमोद कुमार को गिरफ्तार कर जेल भेज दी हुई है।
जिसके साथ मृतका के कथित प्रेम प्रसंग की बात सामने आई थी। हालांकि, अमोद की गिरफ्तारी के बाद पुलिस मुख्य साक्ष्यों और इस जघन्य कृत्य के पीछे की असली साजिश का पर्दाफाश करने में विफल रही है।
मृतका के पति कृष्णमोहन और उनके स्वजन का आरोप है कि यदि पुलिस ने 10 जनवरी को लापता होने की सूचना मिलते ही सक्रियता दिखाई होती, तो आज चार मासूम जिंदगियां बच सकती थीं। अब चार महीने बाद भी जांच का किसी ठोस नतीजे पर न पहुंचना पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रहे है।
