मुजफ्फरपुर से लीची कारोबार का पलायन, पटना और दरभंगा से मुंबई भेजी जा रही खेप
मुजफ्फरपुर में शाही लीची की लोडिंग घट गई है, क्योंकि कारोबारी मुंबई में बढ़ती मांग के चलते दरभंगा, समस्तीपुर और ...और पढ़ें

बिहार मुंबई भेजे गई लीची। जागरण
जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर। विश्व प्रसिद्ध शाही लीची के लिए पहचान रखने वाला मुजफ्फरपुर इस बार लीची लोडिंग के मामले में पिछड़ता नजर आ रहा है।
मुंबई में लीची की बढ़ती मांग और बेहतर दाम को देखते हुए कारोबारी अब मुजफ्फरपुर के बजाय दरभंगा, समस्तीपुर के साथ अब पटना से भी ट्रेनों के जरिए लीची भेजना शुरू कर दिए हैं। इससे मुजफ्फरपुर जंक्शन पर लीची की बुकिंग कम होने लगी है और वीपी में लोडिंग नहीं हो पा रही है।
दरभंगा से दो टन और समस्तीपुर से दो टन लीची की बुकिंग
गुरुवार को जयनगर-लोकमान्य तिलक टर्मिनस पवन एक्सप्रेस में दरभंगा से दो टन और समस्तीपुर से दो टन लीची की बुकिंग हुई। इस तरह पवन एक्सप्रेस के एक पार्सल वैन लीची से भर गया ।
वहीं, दूसरे खाली पार्सल वैन में करीब साढ़े तीन क्विंटल लीची की लोडिंग मुजफ्फरपुर से हुई। इतने ही में रेलवे को 53 हजार से अधिक की आमदनी हुई। इसके अलावा राजनगर-लोकमान्य तिलक मुंबई जाने वाली 13201 ट्रेन से भी कारोबारियों ने लीची की खेप भेजनी शुरू कर दी है ।
यह ट्रेन रात को साढ़े 11 बजे पटना जंक्शन से गुजरती है। इसमें कम भाड़ा के साथ स्कैनिंग भी नहीं होती। इसलिए कारोबारियों को वहां से भेजने में फायदा भी है।
बता दें कि हर साल 15 मई से पांच-सात जून तक मुजफ्फरपुर जंक्शन से बड़े पैमाने पर लीची की वीपी लोडिंग होती थी। 20 से 25 दिनों तक यहां कारोबारियों की भारी भीड़ रहती थी, लेकिन इस बार हालात बदले हुए हैं ।
कारोबारी दूसरे स्टेशनों का रुख कर रहे हैं, जिससे रेलवे को राजस्व का भारी नुकसान होने की आशंका है। हर बार 60 से 65 लाख रुपये तक लीची की सीजन में वीपी से आमदनी होती थी, लेकिन इस बार एक चौथाई भी आमदनी होगी कि नहीं यह भी एक जांच का विषय है।
