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'टीका जो सोहे मांगो...', मुजफ्फरपुर के कटरा में जब टूटी उम्मीद तो लोकगीत और गंगा माई बनीं आसरा

By Keshav KumarEdited By: Ajit kumar
Published: Wed, 30 Sep 2026 04:09 PM (IST)

Bihar Flood Folk Songs: कटरा प्रखंड में बागमती नदी की बाढ़ से सब कुछ तबाह होने के बाद, सरकारी दावों ...और पढ़ें

पानी में खड़े होकर लोकगीत गातीं महिलाएं। फोटो सौ: वायरल वीडियो

पानी में खड़े होकर लोकगीत गातीं महिलाएं। फोटो सौ: वायरल वीडियो

HighLights

  1. बागमती की बाढ़ से कटरा प्रखंड में भारी तबाही।

  2. सरकारी राहत के दावों के विफल होने से निराशा।

  3. बाढ़ग्रस्त महिलाएं लोकगीतों से मां गंगा से कर रहीं प्रार्थना।

केशव कुमार, मुजफ्फरपुर। Katra Flood Feature Story: कटरा प्रखंड। जहां कभी शहनाई, मुंडन और उत्सवों पर मंगलगीत गूंजा करते थे आज वही इलाका बागमती के मटमैले, भयावह पानी में डूबा हुआ है।

जब उफनती धारा में लोगों के आशियाने तिनके की तरह बह गए और राहत के तमाम सरकारी दावे धरे के धरे रह गए तब कटरा की बेबस महिलाएं बाढ़ के पानी में खड़े होकर किसी हाकिम या हुक्मरान की ओर नहीं देख रहीं, बल्कि आंखों में आंसू लिए अपनी ही लोकसंस्कृति और मां गंगा के चरणों में समर्पित हो गई हैं।

व्यवस्था से टूटा भरोसा

बाढ़ के बीच कटरा से दिल को झकझोर देने वाला दृश्य सामने आ रहा है। बागमती के पानी में खड़ी होकर महिलाएं रुंधे गले से पारंपरिक लोकगीत गा रही हैं, "टीका जो सोहे, मांगो गंगा माई के... राजा विराज हैं, गंगा मैया... ओढ़न के ओढ़निया हे गंगा मैया..."।

पानी में अंतहीन इंतज़ार

वर्षों के कड़े परिश्रम से जोड़ी गई गृहस्थी को अपनी आंखों के सामने पानी में समाते देखना किसी जीवन-मरण के संकट से कम नहीं है।

स्थानीय लोगों का दर्द है कि राहत और बचाव के नाम पर कागजी बयानबाजी तो बहुत हुई, लेकिन धरातल पर सिर्फ त्राहि-त्राहि मची है। नावों की किल्लत और तटबंधों पर काटने को दौड़ती रातें अब इनकी नियति बन चुकी हैं।

गंगा माई से गुहार

जो गीत कभी घर-आंगन में खुशहाली लाने के लिए गाए जाते थे, आज वही गीत बागमती के रौद्र रूप को शांत करने का माध्यम बन गए हैं।

पानी की तेज धार के सामने हाथ जोड़े खड़ी ग्रामीण महिलाएं अपने सुहाग, अपने बच्चों और अपने गांव को बचाने के लिए मां गंगा से गुहार लगा रही हैं।

कटरा के जलमग्न गांवों में अब भी सन्नाटे को चीरती हुई यही कातर पुकार गूंज रही है। सूजी हुई आंखों से पानी के घटने का इंतजार करतीं ये महिलाएं सिर्फ एक ही बात कह रही हैं, 'हे गंगा माई, अब तुम्हीं इस आपदा से पार लगाओ, इंसान की बनाई व्यवस्था तो कब की डूब चुकी है।'

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