रोहू, कतला, नैनी और पंगाश पालन बना मुनाफे का सौदा, मुजफ्फरपुर में बढ़ा मछली उत्पादन
मुजफ्फरपुर में रोहू, कतला और पंगाश जैसी मछलियों का पालन किसानों के लिए मुनाफे का सौदा बन गया है, जिससे जिले में मछली उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

इसमें प्रतीकात्मक तस्वीर लगाई गई है।
अमरेन्द्र तिवारी, मुजफ्फरपुर । मुजफ्फरपुर में मछली पालन अब किसानों और युवाओं के लिए कमाई का मजबूत जरिया बनता जा रहा है। रोहू, कतला, नैनी और पंगाश जैसी प्रजातियों की बढ़ती मांग तथा वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाने से जिले में मछली उत्पादन लगातार नई ऊंचाइयों पर पहुंच रहा है।
पिछले तीन वर्षों में उत्पादन में हुई उल्लेखनीय बढ़ोतरी इस बात का संकेत है कि मत्स्य पालन खेती के साथ सबसे अधिक लाभ देने वाले व्यवसायों में तेजी से अपनी पहचान बना रहा है।
तीन वर्षों में 3.23 हजार मीट्रिक टन बढ़ा उत्पादन
जिले में मत्स्य उत्पादन में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। जिला मत्स्य कार्यालय की ओर से तैयार रिपोर्ट विभाग को भेज दी गई है।
आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2023-24 में जिले में 40.05 हजार मीट्रिक टन मछली का उत्पादन हुआ था। वर्ष 2024-25 में यह बढ़कर 42.53 हजार मीट्रिक टन पहुंच गया।
वहीं वर्ष 2025-26 में उत्पादन 43.28 हजार मीट्रिक टन दर्ज किया गया। इस तरह तीन वर्षों में जिले का कुल मछली उत्पादन 3.23 हजार मीट्रिक टन बढ़ गया है।
रोहू, कतला और पंगाश की बढ़ी मांग
जिला मत्स्य पदाधिकारी रंधीर कुमार ने बताया कि जिले के मत्स्य पालक मुख्य रूप से रोहू, कतला, नैनी, पंगाश, ग्रास कार्प, कॉमन कार्प और रूपचंद प्रजाति की मछलियों का पालन कर रहे हैं।
इन सभी प्रजातियों की बाजार में अच्छी मांग है और किसानों को बेहतर कीमत मिल रही है। यही कारण है कि अधिक से अधिक किसान पारंपरिक खेती के साथ मत्स्य पालन को भी अपना रहे हैं।
16 हैचरी से मिल रहा गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज
मत्स्य उत्पादन बढ़ाने में स्थानीय स्तर पर मत्स्य बीज की उपलब्धता भी अहम भूमिका निभा रही है। जिले में कुल 17 हैचरी स्थापित की गई हैं, जिनमें 16 वर्तमान में संचालित हैं।
इन हैचरियों के माध्यम से किसानों को समय पर गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज उपलब्ध हो रहा है। पहले किसानों को बीज खरीदने के लिए दूसरे जिलों या राज्यों का रुख करना पड़ता था, जिससे समय और लागत दोनों बढ़ जाते थे। अब स्थानीय स्तर पर ही बीज मिलने से मत्स्य पालन करना आसान हो गया है।
प्रशिक्षण और सरकारी योजनाओं से मिल रहा लाभ
मत्स्य विभाग किसानों को वैज्ञानिक तरीके से मछली पालन के लिए नियमित प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और विभिन्न सरकारी योजनाओं के तहत आर्थिक सहायता भी उपलब्ध करा रहा है।
विभाग का उद्देश्य केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि आधुनिक और वैज्ञानिक मत्स्य पालन को गांव-गांव तक पहुंचाना है, ताकि किसानों की आय में स्थायी वृद्धि हो सके।
सभी प्रखंडों में चलेगा जागरूकता अभियान
जिला मत्स्य पदाधिकारी ने बताया कि सभी प्रखंडों में जल्द ही जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। इसके तहत किसानों को आधुनिक तकनीकों, बेहतर प्रजातियों के चयन, तालाब प्रबंधन और सरकारी योजनाओं की जानकारी दी जाएगी।
विभाग का मानना है कि वैज्ञानिक पद्धति अपनाने से उत्पादन और मुनाफा दोनों बढ़ेंगे। इसी उद्देश्य से जिले की समीक्षा रिपोर्ट विभाग को भेजी गई है, ताकि आगे की योजनाओं को और प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके।
