विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

Bihar News : आपके मोहल्ले का ट्रांसफार्मर भी रहेगा अफसरों की नजर में, खराबी मिलते ही एप पर होगी कार्रवाई

Published: Thu, 08 Oct 2026 07:00 AM (GMT+05:30)

बिजली विभाग ने व्यवस्था सुधारने के लिए पीएसएस एसेट मैनेजमेंट एप सिस्टम लागू किया है। यह एप ट्रांसफार्मर और पावर ...और पढ़ें

इसमें प्रतीकात्मक तस्वीर लगाई गई है।

इसमें प्रतीकात्मक तस्वीर लगाई गई है।

HighLights

  1. बिजली विभाग ने पीएसएस एसेट मैनेजमेंट एप सिस्टम लगाया।

  2. ट्रांसफार्मर, पावर सब स्टेशन और अधिकारियों की होगी निगरानी।

  3. निरीक्षण में कमी पर अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी।

गोपाल तिवारी, मुजफ्फरपुर। बिजली व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए बिजली विभाग ने पीएसएस एसेट मैनेजमेंट एप सिस्टम लगाया है। ट्रांसफार्मर, पावर सब स्टेशन से लेकर बिजली अधिकारियों की मानीटरिंग होगी।

एप से अधिकारियों की सुस्ती की पोल खुलेगी। काम नहीं करने वाले बिजली अधिकारियों पर अब मुख्यालय स्तर से कार्रवाई तय होगी। नार्थ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड के निदेशक (परिचालन) विजय कुमार की ओर से जारी पत्र में निरीक्षण की स्थिति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।

1140 डिस्ट्रीब्यूशन सब स्टेशन (डीएसएस) की जांच करने का आदेश दिया गया है। दरभंगा में दो पीएसएस व 12 डीएसएस, समस्तीपुर में एक भी पीएसएस और 34 डीएसएस, छपरा में शून्य पीएसएस व दो डीएसएस, जबकि किशनगंज में शून्य पीएसएस और 93 डीएसएस का निरीक्षण दर्ज है। पूर्व में अंचलों में पीएसएस निरीक्षण की संख्या शून्य रही है।

निदेशक ने पत्र में कहा कि लक्ष्य के अनुरूप प्रत्येक माह पीएसएस एवं डीएसएस का निरीक्षण एप के माध्यम से सुनिश्चित किया जाए। निरीक्षण में किसी तरह की खराबी मिलने पर विभागीय नियमानुसार समाधान कर उसे एप पर अपलोड करें।

विद्युत कार्यपालक अभियंता श्रवण ठाकुर के अनुसार किस अधिकारी ने कितने पावर स्टेशन और उपकरणों का निरीक्षण किया, इसका पूरा ब्योरा एप पर दर्ज होगा।

विद्युत कनीय अभियंता (जेई) को अपने क्षेत्र के सभी ट्रांसफार्मरों की जांच करनी होगी। इसके साथ ही प्रत्येक ट्रांसफार्मर पर लगे मीटरिंग सिस्टम की स्थिति भी देखनी होगी।

जांच के दौरान किसी तरह की खराबी, तकनीकी गड़बड़ी या अन्य असामान्यता मिलने पर उसका समाधान कर रिपोर्ट एप पर अपलोड करनी होगी। इससे क्षेत्र में लगे ट्रांसफार्मरों की वास्तविक स्थिति की जानकारी अधिकारियों के पास उपलब्ध रहेगी।

वहीं सहायक विद्युत अभियंता (एईई) को तीन महीने के भीतर अपने क्षेत्र के सभी पावर सब स्टेशनों का 100 प्रतिशत निरीक्षण पूरा करना होगा। इसके अलावा विद्युत कार्यपालक अभियंता (ईईई) को निर्धारित अवधि में कम से कम 35 प्रतिशत पावर स्टेशनों का निरीक्षण करेंगे।

निरीक्षण व्यवस्था को और ऊपर तक ले जाते हुए विद्युत अधीक्षण अभियंता (एसई) को भी अपने क्षेत्र में पांच प्रतिशत का आल ओवर निरीक्षण करने का आदेश दिया है।

इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पावर स्टेशन और ट्रांसफार्मर की स्थिति की जानकारी सिर्फ निचले स्तर के निरीक्षण पर निर्भर नहीं रहे।

अलग-अलग स्तर के अधिकारी मौके पर जाकर जांच करेंगे और उसका डिजिटल रिकार्ड एप पर दर्ज करेंगे। इससे यह भी पता चलेगा कि किस स्तर के अधिकारी ने कितने स्टेशनों का निरीक्षण किया और निरीक्षण के दौरान क्या कमियां मिलीं। अब निरीक्षण की जिम्मेदारी के साथ उसकी डिजिटल जवाबदेही भी तय होगी।