मुजफ्फरपुर में कौन सा क्षेत्र भूकंप के संवेदनशील जोन में, पता लगाएंगे भूविज्ञानी
Muzaffarpur Earthquake Risk : भारतीय भूविज्ञानी सर्वेक्षण (GSI) की टीम मुजफ्फरपुर में भूकंप के संवेदनशील क्षेत्रों का पता लगाने के ...और पढ़ें

Earthquake Vulnerable Zones : इसमें एआई जनरेटेड तस्वीर लगाई गई है।
HighLights
GSI टीम मुजफ्फरपुर में भूकंप संवेदनशील क्षेत्रों का जियोफिजिकल सर्वे करेगी।
माइक्रोजोनेशन तकनीक से जमीन की संरचना और भूकंप असर का पता।
यह सर्वे 2027 तक चलेगा, आपदा प्रबंधन रणनीति बनाने में मदद करेगा।
बाबुल दीप, मुजफ्फरपुर । GSI Geophysical Survey : जिले में कौन सा क्षेत्र भूकंप की दृष्टिकोण से संवेदनशील जोन में है, यह पता लगाने के लिए भारतीय भूविज्ञानी सर्वेक्षण (जीएसआइ) टीम जियोफिजिकल सर्वे करेगी। यहां अस्थायी कैंप लगाकर अत्याधुनिक उपकरणों के साथ सर्वे किया जाएगा।
यह कार्य वर्ष 2027 तक चलेगा। इस दौरान टीम जिले के विभिन्न इलाकों का भ्रमण करेगी और पता लगाएगी कि कौन सा इलाका भूकंप के संवेदनशील जोन में आता है।
माइक्रोजोनेशन तकनीक से यह सर्वे किया जाएगा। इससे यह पता लगेगा कि जिले के किस हिस्से में जमीन की संरचना कैसी है और भूकंप आने पर यहां इसका कैसा असर होगा? इससे भविष्य में भवन निर्माण, विकास योजना और आपदा प्रबंधन की रणनीति बनाने में मदद मिलेगी।
जीएसआइपूर्वी क्षेत्र कोलकाता की निदेशक (भूभौतिकी) गीता गुप्ता ने जिलाधिकारी और एसएसपी से टीम व उपकरणों की सुरक्षा को लेकर आवश्यक सहयोग का अनुरोध किया है।
यह सर्वे अगले माह से शुरू होने की संभावना है। भारत सरकार के खान मंत्रालय से अनुमोदित कार्यक्रम के आलोक में यह सर्वे किया जाएगा। विभाग के वरिष्ठ भूभौतिकीविद संदीप कुमार और भूभौतिकीविद निवा ब्रह्मा के नेतृत्व में टीम सर्वे करेगी। इसके बाद इसकी रिपोर्ट केंद्र और राज्य सरकार को सौंपी जाएगी।
भूकंप जोन-चार और पांच में आता है जिला
Earthquake Safety Map : विदित हो कि मुजफ्फरपुर भूकंप के जोन चार और पांच में आता है। बताया गया कि माइक्रोजोनेशन तकनीक एक प्रकार का सिटी स्कैन है। एक ही शहर में कहीं भराव वाली तो कहीं बालू वाली जमीन होती है।
भूकंप आने पर सब जगह एक जैसा झटका नहीं लगता है। इस सर्वे से पता लगेगा कि किस मोहल्ले या इलाके में जमीन कितनी कमजोर है और कहां दलदले पदार्थ की तरह व्यवहार करती है।
टीम जमीन में छोटे-छोटे सेंसर यानी जियोफोन और सिस्मोमीटर लगाएगी। वाइब्रेशन उत्पन्न करके देखा जाएगा कि भूकंप की लहर जमीन के नीचे कितनी तेज जाती है।
डाटा कलेक्शन के साथ तैयार होगा मैप
सर्वे के दौरान माइक्रोट्रेमर समेत अन्य तकनीक से 30 मीटर नीचे तक जमीन की जांच होगी। कहीं-कहीं हल्की ड्रिलिंग कर डाटा संग्रहित किया जाएगा।
इस डाटा से पूरे शहर का मैप तैयार होगा। इससे किसी क्षेत्र में भविष्य में आने वाले भूकंपों की संभावना और जमीन के हिलने की तीव्रता को दर्शाने के बारे में जानकारी मिलेगी।
सर्वे से यह पता लगेगा कि किस क्षेत्र में कितनी ऊंची भवन का निर्माण किया जाना है। इसी आधार पर नक्शा पास किया जाएगा। आपदा प्रबंधन विभाग को पता रहेगा कि भूकंप आने पर सबसे पहले किस इलाके में मदद पहुंचानी है।
भूविज्ञानी टीम के द्वारा सर्वे करने के बारे में जानकारी ली जा रही है। सर्वे में जो भी आवश्यक सहयोग होगा, उन्हें मुहैया कराई जाएगी।
कुमार गौरव, जिलाधिकारी
