मुजफ्फरपुर में म्यूटेशन में गड़बड़ी पर कड़ा एक्शन, निरस्त दाखिल खारिज को किया ओके, अब कटेगी पेंशन
मुजफ्फरपुर डीएम ने अस्वीकृत दाखिल-खारिज मामलों को दोबारा स्वीकृत करने के आरोप में राजस्व कर्मचारी शिव कुमार दास के खिलाफ ...और पढ़ें

डीएम ने दोषी कर्मचारी की पेंशन से दो वर्षों तक दस प्रतिशत राशि कटौती करने का स्पष्ट निर्देश जारी किया है। (AI Generated Image)
HighLights
डीएम ने अस्वीकृत दाखिल-खारिज मामलों पर सख्त कार्रवाई की।
राजस्व कर्मचारी शिव कुमार दास की पेंशन से 10% कटौती होगी।
यह कार्रवाई दो वर्षों तक प्रभावी रहेगी, अंचल कार्यालयों में हड़कंप।
संवाद सहयोगी, मुशहरी (मुजफ्फरपुर)। Muzaffarpur DM Action: अस्वीकृत दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) वादों को दोबारा आवेदन के आधार पर स्वीकृत करने के मामले में मुजफ्फरपुर जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है।
जिलाधिकारी (डीएम) ने मामले में दोषी पाए गए राजस्व कर्मचारी शिव कुमार दास के खिलाफ सख्त अनुशासनिक कार्रवाई की है।
डीएम ने दोषी कर्मचारी की पेंशन से दो वर्षों तक दस प्रतिशत राशि कटौती करने का स्पष्ट निर्देश जारी किया है।
कर्मचारी पर गिरी गाज
दाखिल खारिज में गड़बड़ी के समय संबंधित राजस्व कर्मचारी मुशहरी और कुढ़नी अंचल में पदस्थापित थे। जिला प्रशासन की इस बड़ी कार्रवाई के बाद से अंचल कार्यालयों और राजस्व कर्मियों के बीच हड़कंप का माहौल है।
अस्वीकृत आवेदनों की स्वीकृति
मामला वर्ष 2021 और 2022 से जुड़ा है, जब करीब एक दर्जन ऐसे दाखिल-खारिज वादों को दोबारा स्वीकृत कर दिया गया, जिन्हें पूर्व में अंचल अधिकारी ने अस्वीकृत कर दिया था।
जमीन से जुड़े उन्हीं दस्तावेजों का दोबारा आवेदन कराकर नियमविरुद्ध तरीके से दाखिल-खारिज कर दिया गया।
डीएम से हुई शिकायत
विवादित भूमि का दाखिल खारिज होने के बाद पीड़ित पक्ष ने पूरे मामले की लिखित शिकायत डीएम से की। जिला प्रशासन द्वारा कराई गई उच्चस्तरीय जांच में दाखिल-खारिज की पूरी प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही और अनियमितता बरतने की पुष्टि हुई।
कर्मचारी ने दी सफाई
जांच के दौरान आरोपी राजस्व कर्मचारी शिव कुमार दास ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि दाखिल खारिज स्वीकृत या अस्वीकृत करने का अंतिम अधिकार अंचल अधिकारी के पास होता है। आवेदन सीधे अंचल अधिकारी के लॉगिन से उनके पास आता था और उस समय काम का अत्यधिक दबाव भी था।
सॉफ्टवेयर की तकनीकी खामी
कर्मचारी ने यह तर्क भी दिया कि ऑनलाइन सॉफ्टवेयर के माध्यम से संबंधित दस्तावेज के पूर्व में अस्वीकृत होने की कोई जानकारी प्राप्त नहीं हो सकी थी। इस वजह से दोबारा आवेदन किए जाने के तथ्य की जानकारी उन्हें समय पर नहीं मिल पाई।
लापरवाही पर चला डंडा
मामले की विस्तृत सुनवाई के बाद डीएम ने कर्मचारी के तर्कों को सुना, लेकिन यह भी स्पष्ट किया कि सरकारी कार्य के निष्पादन में बरती गई लापरवाही को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
डीएम ने कहा कि किसी भी संवेदनशील कार्य में सतर्कता अनिवार्य है, इसी आधार पर पेंशन से 10% कटौती का दंडात्मक आदेश जारी किया गया।
