मुजफ्फरपुर में 45 करोड़ का पुल छह साल से अधूरा, गुणवत्ता जांच में खामियां मिलीं तो एजेंसी डिबार
मुजफ्फरपुर में बूढ़ी गंडक नदी पर बन रहे पुल के निर्माण में गड़बड़ी मिलने पर गणेश राम डोकानिया एजेंसी को ...और पढ़ें

मुजफ्फरपुर में चंदवारा पुल। जागरण
जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर। बूढ़ी गंडक नदी पर जगन्नाथ मिश्रा कालेज के निकट सोडा गोदाम चौक एवं अहियापुर के बीच उच्चस्तरीय आरसीसी पुल एवं पहुंच पथ का निर्माण कर रही एजेंसी गणेश राम डोकानिया पर कार्रवाई की गई है।
मानक के अनुसार कार्य नहीं करने पर अगले दो साल यानी 26 जुलाई 2028 तक किसी भी निविदा में भाग लेने से एजेंसी को वंचित (डिबार) कर दिया गया है। इस संबंध में बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड के प्रबंध निदेशक ने आदेश जारी किया है।
विदित हो कि पुल निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर लगातार मिल रहीं शिकायतों के बाद चार जुलाई 2026 को संयुक्त निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के क्रम में पुल की कुछ रेलिंग को क्षतिग्रस्त पाया गया। कई जगह सरिया खुला दिखाई पर रहा था।
गार्डर में हल्का दरार भी मिला था। जांच में पुल के सभी स्पैन में प्रापर ड्रेनेज स्पाट नहीं लगा हुआ पाया गया। पुल के विभिन्न अवयवों का रिबाउंड हैमर टेस्ट किया गया। इसमें मानक के अनुरूप काम नहीं पाया गया।
पुल निर्माण कार्य मानक के अनुरूप नहीं कराए जाने के कारण वरीय गुण नियंत्रण अभियंता द्वारा संवेदक को अगले दो वर्ष के लिए डिबार करने की अनुशंसा की गई। इसके बाद बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड ने संवेदक से स्पष्टीकरण मांगा। 18 जुलाई को 2026 को स्पष्टीकरण दिया गया।
इस पर पटना अंचल के उप मुख्य अभियंता एवं कार्य प्रमंडल मुजफ्फरपुर के वरीय परियोजना अभियंता से मंतव्य एवं अनुशंसा उपलब्ध कराने को कहा गया। इसके बाद उप मुख्य अभियंता ने स्पष्टीकरण को अमान्य करते हुए अगले दो वर्षों के लिए डिवार करने की अनुशंसा की। उप मुख्य अभियंता की अनुशंसा के आलोक में निगम के प्रबंध निदेशक ने संवेदक को दो साल के लिए डिबार कर दिया।
गाैरतलब है कि मानक के अनुसार काम नहीं करने की शिकायत सामाजिक कार्यकर्ता देवव्रत कुमार साहनी ने की थी। उन्होंने संवेदक पर हुई कार्रवाई को कम बताते हुए सरकार से सख्त कदम उठाने की मांग की है।
पुल चालू होने में छह साल की देरी, एक दर्जन डेडलाइन फेल
करीब 45 करोड़ की लागत से लगभग तीन किमी लंबे चंदवारा पुल को 2018-19 में मुख्य निर्माण पूरा होने के बाद चालू हो जाना चाहिए था। एप्रोच रोड और भूमि अधिग्रहण में देरी के कारण इसकी कई डेडलाइन फेल हो चुकी हैं। इसे शुरू करने के लिए एक दर्जन से अधिक बार डेडलाइन तय की गई। अब बिना उद्घाटन ही दो पहिया और छोटी गाड़ियां इससे चलने लगी हैं।
