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Muzaffarpur News : बाढ़ से बर्बाद फसलों के बाद खाली खेतों में प्याज, सरसों-तोरी और सब्जी की करें खेती

Published: Tue, 13 Oct 2026 12:20 AM (GMT+05:30)

मुजफ्फरपुर में बाढ़ और अनिश्चित मौसम से प्रभावित किसानों को अब वैकल्पिक खेती की ओर बढ़ना चाहिए, जिसमें प्याज, सरसों ...और पढ़ें

जागरण विमर्श में कृषि विशेषज्ञ नागेश्वर ठाकुर। जागरण

जागरण विमर्श में कृषि विशेषज्ञ नागेश्वर ठाकुर। जागरण

अमरेन्द्र तिवारी, मुजफ्फरपुर। मौसम की अनिश्चितता और बाढ़ से परेशान किसानों को अब वैकल्पिक खेती की ओर कदम बढ़ाना चाहिए। खासकर जिन इलाकों में बाढ़ से खरीफ की फसल बर्बाद हुई है, वहां खेतों से पानी निकलते ही प्याज, सरसों-तोरी और सब्जियों की खेती करना फायदेमंद हो सकता है।

इससे फसल क्षति की भरपाई करने और आमदनी बढ़ाने में मदद मिलेगी। साथ ही कृषि उपज की सरकारी खरीद की व्यवस्था को पारदर्शी बनाने की जरूरत है।

'कृषि उपज और सरकारी खरीद तंत्र के संतुलन, समन्वय और उसकी खामियां' विषय पर आयोजित जागरण विमर्श में कृषि विशेषज्ञ एवं पूर्व जिला उद्यान पदाधिकारी नागेश्वर ठाकुर ने यह जानकारी दी।

बताया कि पहले तो अनियमित बारिश के कारण खरीफ की फसल प्रभावित हुई। इसके बाद सितंबर में बारिश के साथ बाढ़ आने से भी फसलों को नुकसान पहुंचा।

इस बार करीब छह प्रतिशत कम धान की रोपनी हुई है। इसका असर उत्पादन पर भी पड़ सकता है। ऐसे में किसानों को मौसम की परिस्थितियों के अनुसार फसल का चयन करना चाहिए।

जिन खेतों में बाढ़ के कारण फसल बर्बाद हो गई है, वहां पानी निकलने के बाद प्याज, सरसों-तोरी, मूली, साग और अन्य सब्जियों की खेती की जा सकती है। धान की भरपाई आलू, हल्दी, ओल, शिमला मिर्च और स्ट्राबेरी जैसी फसलों से की जा सकती है। किसान इन फसलों से बेहतर आमदनी हासिल कर सकते हैं।

उत्पादन बढ़ा, लेकिन किसानों को उचित कीमत की चुनौती

तीन दशक पहले की तुलना में धान की नई किस्मों के आने से उत्पादन क्षमता में वृद्धि हुई है। हालांकि, किसानों को उपज का उचित मूल्य दिलाना अब भी चुनौती है।

सरकार धान खरीद के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) निर्धारित करती है, लेकिन इसका लाभ सभी किसानों तक पूरी तरह नहीं पहुंच पाता है। धान बेचने के लिए किसानों को कई बार अतिरिक्त अनाज देने की शिकायतें भी सामने आती हैं। सरकारी गोदामों की कमी भी धान खरीद व्यवस्था को प्रभावित करती है।

इस दिशा में निगरानी बढ़ाने और खरीद व्यवस्था को पारदर्शी बनाने की जरूरत है। सब्जियों के साथ आम और लीची के बाग लगाने के लिए भी सरकार की ओर से सहायता दी जा रही है।

किसानों को इन विकल्पों की ओर बढ़ना चाहिए। सब्जी उत्पादकों को उपज के अनुरूप बाजार नहीं मिल पाता। कई बार उन्हें उचित कीमत नहीं मिलती है।

ऐसे में कृषि विभाग को बाजार नेटवर्क मजबूत करने, किसानों को बाजार से जोड़ने और उनकी उपज की बेहतर बिक्री सुनिश्चित करने की दिशा में पहल करनी चाहिए।