मुजफ्फरपुर में चांदनी चौक से रामदयालु सिक्सलेन सड़क निर्माण का रास्ता साफ, 500 पेड़ों पर चलेगी आरी
मुजफ्फरपुर में चांदनी चौक से रामदयालु तक 44 करोड़ की लागत से सिक्सलेन सड़क निर्माण की तैयारी शुरू हो गई ...और पढ़ें

मुजफ्फरपुर में सड़क किनारे लगे पेड़ों की होगी कटाई।
HighLights
चांदनी चौक से रामदयालु तक सिक्सलेन सड़क निर्माण।
500 पेड़ों को काटा या शिफ्ट किया जाएगा।
44 करोड़ की लागत से जाम से मिलेगी राहत।
जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर। बिहार में मुजफ्फरपुर के चांदनी चौक से रामदयालु तक सिक्सलेन सड़क निर्माण की कवायद शुरू हो गई है। इसके लिए एनएच किनारे से 500 पेड़ों पर आरी चलेगी।
पुल निर्माण निगम ने इन पेड़ों की गिनती कर मार्किंग का काम शुरू कर दिया है। पांच सौ से अधिक पेड़ एनएच किनारे लगे हुए हैं। इनमें से कुछ को शिफ्ट किया जाएगा और कुछ पेड़ों को काटकर हटाया जाएगा।
बताया गया कि इनमें वन विभाग के पेड़ों के साथ निजी प्रतिष्ठानों की जमीन पर लगे पेड़ भी शामिल हैं। पुल निर्माण विभाग के वरीय परियोजना अभियंता ने बताया कि विभाग के अधिकारी गिनती का काम कर रहे हैं।
गिनती पूरी होने के बाद रिपोर्ट की समीक्षा की जाएगी। इसके बाद जिला प्रशासन से पेड़ों की शिफ्टिंग के लिए उपयुक्त भूमि उपलब्ध कराने का अनुरोध किया जाएगा।
जगह मिलने के बाद चिह्नित पेड़ों को हटाने अथवा शिफ्ट करने की प्रक्रिया शुरू होगी। पेड़ों की बाधा दूर होने के बाद सिक्सलेन निर्माण की दिशा में आगे की कार्रवाई की जाएगी।
विदित हो कि करीब 44 करोड़ रुपये से सिक्स लेन का काम किया जाना है। यह प्रस्ताव पिछले एक साल से लंबित था। पिछले दिनों पथ निर्माण विभाग के मंत्री ई. शैलेंद्र कुमार ने इसका अवलोकन किया था। एनएचएआइ की ओर से इसके लिए एनओसी दे दिया गया है।
चांदनी चौक से रामदयालु मोड़ तक एनएच पर दिनभर वाहनों का अत्यधिक दबाव रहता है। इससे अक्सर भीषण जाम की समस्या होती है। सर्विस लेन पर अतिक्रमण होने से आवागमन भी बाधित होता है।
सिक्स लेन होने के बाद अतिक्रमण की समस्या भी समाप्त हो जाएगी। इससे चांदनी चौक, भगवानपुर और रामदयालु मोड़ के बीच आवागमन सुगम होने के साथ लंबे समय से लगने वाले जाम से भी राहत मिलेगी।
- चांदनी चौक से रामदयालु सिक्सलेन निर्माण के लिए पेड़ों की होगी कटाई
- पुल निर्माण निगम के अधिकारियों ने पेड़ों की गिनती कर शुरू की मार्किंग
- पेड़ शिफ्टिंग करने के लिए मांगी जाएगी भूमि, कुछ को काटा भी जाएगा
