मुजफ्फरपुर, जेएनएन। प्रदूषण नियंत्रण को लेकर बीएस-4 इंजन वाले वाहनों की बिक्री पर रोक लगा दी गई। सरकारी निर्देश के मुताबिक बीएस-6 इंजन वाले वाहनों की ही बिक्री शुरू हुई। एक अप्रैल से बीएस-4 इंजन वाले वाहनों के रजिस्ट्रेशन पर भी रोक है। 31 मार्च तक ऑनलाइन डाटा अपलोड करने वाले वाहनों के निबंधन का ही प्रावधान किया गया।

कई वाहन एजेंसियों ने कीमत में छूट देकर स्टॉक को खत्म कर लिया। मगर लॉकडाउन की वजह से कई एजेंसियों के पास काफी संख्या में वाहन बच गए। फिर सुप्रीम कोर्ट ने राहत देते हुए 10 फीसद वाहन बिक्री का आदेश दिया। सुप्रीम कोर्ट की इस राहत की आड़ में कई एजेंसियों ने धड़ल्ले से वाहन बेचे। उनके द्वारा लोगों को रजिस्ट्रेशन कराने का भरोसा भी दिलाया गया। इस बीच परिवहन विभाग ने बीएस-4 का पोर्टल बंद कर दिया। इससे काफी संख्या में वाहनों का निबंधन अटक गया। निबंधन नहीं होने से लोगों के लिए यह परेशानी का सबब बन गया। ऐसे दो सौ से अधिक लोग वाहन एजेंसियों से लेकर जिला परिवहन कार्यालय तक का चक्कर काट रहे हैं।

तीन माह में बिके 11 सौ से अधिक वाहन, 204 का निबंधन अटका

जनवरी से 31 मार्च जिला परिवहन कार्यालय में 1114 वाहनों के निबंधन के लिए डाटा अपलोड किए गए। इनमें 910 का निबंधन हुआ। इस बीच परिवहन विभाग द्वारा बीएस-4 पोर्टल बंद कर दिए जाने की वजह से 204 वाहनों का निबंधन अटक गया। ऐसे वाहन मालिक परेशान हैं।

क्या है बीएस मानक

बीएस उत्सर्जन मानक भारत सरकार द्वारा स्थापित किए गए हैं। इसके जरिए मोटर वाहनों के कारण होने वाले वायु प्रदूषण की मात्रा की व्याख्या की जाती है। बीएस के आगे संख्या के बढ़ते जाने का मतलब है उत्सर्जन के बेहतर मानक, जो पर्यावरण के अनुकूल हैं।

 जिला परिवहन पदाधिकारी रजनीश लाल ने कहा कि 'परिवहन विभाग के निर्देशानुसार बीएस-4 वाहनों का निबंधन किया गया। आगे जो भी निर्देश होगा उसके अनुसार निबंधन किया जाएगा।'

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