मुजफ्फरपुर : बागमती के जलस्तर में गुरुवार को दो फीट की कमी आई। स्थिति में सुधार को देखते हुए विस्थापित अपने घरों की सफाई करने पहुंचे। वहीं, कई क्षेत्रों में जलजमाव की स्थिति बनी हुई है और विस्थापित घर नहीं लौटना चाहते। उनका कहना है कि बाढ़ का समय अभी समाप्त नहीं हुआ है। कभी भी जलस्तर में वृद्धि हो सकती है। कारण, सावन-भादो की वर्षा अभी बाकी है। ऐसे में घर लौटने से बेहतर है कि हम बाढ़ का इंतजार करें। उधर, लखनदेई से आया काला पानी कई पंचायतों में घुस गया जिसके निकलने का मार्ग नहीं है। इससे लोगों को जलजनित बीमारी फैलने का भय सता रहा है।

जलस्तर में कमी के बाद धीरे-धीरे विस्थापित अपने घर लौटने की जुगत में लग गए हैं। इसके पहले घर की साफ-सफाई शुरू कर दी है। पहसौल निवासी मो. सितारे घर की सफाई में जुट गए। बताया कि पानी से घिरने के बाद घर के अंदर कई प्रकार के विषैले कीटाणुओं का बसेरा हो गया था। इसलिए पहले सफाई कर सूखने का इंतजार करना होगा। ऐसी हीं बात बसंत और अंदामा के बाढ़ पीड़ितों ने कहीं। परमेश्वर दास का कहना था कि जलजमाव के कारण फूस की झोपड़ी गिर गई। अब नए सिरे से बांस-बल्ली जोड़कर घर तैयार करना होगा। अभी पानी के कारण बांस भी नहीं मिल रहा है। इसलिए समय का इंतजार करना होगा। तबतक हम बांध पर ही गुजारा करेंगे।

बागमती रिग बांध पर शरण लिए लगभग पांच दर्जन दलित परिवार घर लौटने की जल्दी में नहीं हैं। पीड़ित धनेश्वर मांझी, प्रकाश मांझी, शिवलाल मांझी, दाहु मांझी आदि ने बताया कि हम अभी घर नहीं लौटेंगे। मजदूरी तो बांध पर रहकर भी मिल जाएगी। घर जाने पर मवेशी कहां बांधेंगे। अभी जमीन गीली है जिससे रहना मुश्किल है। घर के चारों ओर जलजमाव है जिसमें सांप-बिच्छू का खतरा बना रहता है। फिर पानी बढ़ भी सकता है और घर छोड़ना पडेगा। इसलिए बांध ही ठीक है।

लखनदेई नदी से आई बाढ़ अपने साथ काला पानी लेकर आई है। यह पानी प्रखंड के डुमरी, शहनौली, धोबौली, नगवारा, कटाई, पहसौल आदि गांवों में फैल गया है। इस जहरीले पानी से लोग परेशान हैं। उफरौली निवासी दिनेश सहनी का कहना है कि काला पानी जहरीला है। इसके पीने से मवेशी बीमार हो रहे हैं। पानी से गुजरने पर पैर खुजलाने लगता है। यह उपजाऊ भूमि को भी नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए सीओ को आवेदन देकर जलनिकासी का प्रबंध करने की गुहार लगाई है। बताया जाता है कि यह पानी किसी चीनी मिल से निकलकर सीतामढ़ी के रास्ते लखनदेई में पहुंचता है। इसपर रोक लगाने की भी मांग की गई है।