पश्‍च‍िम चंपारण (बेतिया), जासं। दीपों का पर्व दीपावली में करीब एक सप्ताह की देरी है। पर्व को लेकर तैयारी शुरू हो गई है। दशहरा बीतने के बाद से ही लोग अपने अपने घरों और आसपास की सफाई शुरू कर दिए हैं। बजाज में प्रतिष्ठानों और छोटे-बड़े दुकानों की भी सफाई हो रही है। लोग रंग रोगन भी करा रहे हैं। दीपावली पर्व को लेकर बाजार सजने लगा है। लक्ष्मी गणेश की मूर्तियां, मिट्टी के दीये की बिक्री अभी से ही शुरू हो गई है। दीपावली में लक्ष्मी गणेश की मूर्तियों का विशेष महत्व होता है।

बाजार में लक्ष्मी गणेश की तरह-तरह की आकर्षक मूर्तियां बिक रही है। मिट्टी के अलावे, प्लास्टर ऑफ पेरिस, पीतल, चांदी की भी लक्ष्मी गणेश की मूर्तियां बिक रही है। हालांकि सबसे ज्यादा बिक्री मिट्टी की लक्ष्मी गणेश की मूर्तियों की है। कुछ वर्ष पहले तक बजाज में लक्ष्मी गणेश की चाइनीज मूर्तियों की भी भरमार रहती थी। लेकिन सीमा पर चीन से तनाव और गलवन की घटना के बाद से दीपावली में चाइनीस सामान के बहिष्कार का जो ट्रेड चला, उसका असर अभी भी देखने को मिल रहा है।

इस बार बाजार में दीपावली में उपयोगी चाइनीस सामान काफी कम दिख रही है। चाइनीस सामान की खरीददारी से लोगों की दूरी बनाने के कारण दुकानदार भी अब चाइनीज माल मंगाने से कतराते है। पूजा सामग्री और झालर फूल विक्रेता अजय कुमार ने बताया कि कुछ वर्ष पहले तक चाइनीस सामान की खूब बिक्री होती थी। लेकिन अब लोग देसी सामग्री को ही तवज्जो दे रहे हैं। लोग चाइनीस सामान से दूरी बनाने लगे हैं। बिक्री नहीं होने से कई लोगों के चाइनीज माल दुकान में ही पड़ा रह जाता है। जिस वजह से दुकानदार भी चाइनीज माल नहीं मंगा रहे हैं।

मिट्टी की मूर्तियां पहली पसंद

दीपावली पर्व में लोगों की पहली पसंद मिट्टी की मूर्तियां बनी हुई है। लोग आकर्षक मिट्टी की मूर्तियां खरीद रहे है। पवन कुंभकार ने बताया कि प्रतिवर्ष लक्ष्मी गणेश की छोटे-छोटे हजारों मूर्तियां बनाता है। सभी मूर्तियां बिक जाती है। इस साल भी लक्ष्मी गणेश की मूर्तियों का अंतिम रूप दिया जा रहा है। मूर्तियों की पेंङ्क्षटग हो रही है। खरीददार भी आ रहे हैं। इसके अलावे मिट्टी के दीये की भी बिक्री शुरू हो गई है। पपन सोनार ने बताया कि हर साल कुछ लोग चांदी की भी लक्ष्मी गणेश की मूर्तियां खरीदते हैं। बिक्री के लिए चांदी की लक्ष्मी गणेश की मूर्तियां भी मंगा ली गई है।