मुजफ्फरपुर, जेएनएन। बीआरए बिहार विश्वविद्यालय में शिक्षक अपने घर पर ही कॉपी जांच करेंगे। इसका नफा-नुकसान क्या होगा, यह तो वक्त ही बताएगा। मगर उससे पहले पारिश्रमिक के तौर पर मिलने वाली कमाई मारे जाने के अंदेशे से शिक्षकों की बेचैनी बढ़ गई है। स्नातक थर्ड पार्ट-2019 की परीक्षा अभी चल ही रही है तब तक जीएस (सामान्य अध्ययन) का पेपर जो बीत चुका है, उसकी कॉपी जांच साथ-साथ करने का आदेश हुआ है।

परीक्षा और कॉपी जांच दोनों साथ-साथ नहीं हो सकती इसलिए परीक्षकों को कह दिया गया है कि वे घर पर कॉपी ले जाकर जांच करें। मगर यह छूट शिक्षकों को रास नहीं आ रहा। उन्होंने विरोध करना शुरू कर दिया है। पारदर्शिता को आधार बनाकर विश्वविद्यालय में ही सेंटरलाइज्ड चेकिंग करने पर अड़े हुए हैं।

  कुलपति डॉ. आरके मंडल को अपना विरोध जता चुके हैं। मगर रास्ता निकलता नहीं दिख रहा। क्योंकि, विश्वविद्यालय फिजूलखर्ची के साथ वक्त बचाने की जुगत भिड़ाए हुए है। शिक्षकों का तर्क है किघर पर कॉपी देखेंगे तो निष्पक्ष मूल्यांकन पर संदेह बना रहेगा। उपर से बाहरी पैरवी का दबाव बना रहेगा तथा कॉपी की सुरक्षा भी चिंता का सबब रहेगी।

परीक्षक अपने पारिश्रमिक के लिए अधिक बेचैन

परीक्षा नियंत्रक डॉ. मनोज कुमार का कहना है कि विरोध करने वाले शिक्षक ही बताएं कि परीक्षा और मूल्यांकन के लिए शिक्षक कहां से आएंगे। अभी 31 सेंटर पर परीक्षा हो रही है और ये परीक्षाएं लगातार पांच जनवरी तक चलेंगी। यदि आप सेंटरलाइज्ड मूल्यांकन कराते हैं, तो 31 कॉलेज के शिक्षकों को इस काम से वंचित होना पड़ जाएगा। बिहार में आरा, छपरा, मगध, हजारीबाग की सबकी कॉपियां यहां आती रही हैं और घर में ही जांची जाती गईं।

चूंकि सुबह नौ से शाम छह बजे तक परीक्षाओं का दौर ही चलेगा, ऐसे में शिक्षक कहां से आएंगे, जो परीक्षा भी कराएं और मूल्यांकन भी। सही समय पर रिजल्ट भी देने की चुनौती है। ऐसे में अगर शिक्षक पारदर्शिता की बात करते हैं तो यह उनपर ही निर्भर करता है। वैसे सबके लिए मुख्य परीक्षक का इंतजाम भी है। वे लोग भी पारदर्शिता परखेंगे।

पांच फीसद कॉपी रैंडमली चेक कर यह पता लगाएंगे कि कॉपियां ठीक से देखी गई हैं या नहीं। तभी रिजल्ट स्वीकार होगा। फुल प्रुफ सिस्टम है इसमें कहीं कोई दिक्कत नहीं होने वाली। परीक्षक को भी नहीं पता है कि उनको कौन सी कॉपी देखने को मिल रही है। हां, यह दीगर बात है कि परीक्षकों का पारिश्रमिक जो विभिन्न मदों में वे उठाते रहे हैं उससे उन्हें वंचित होना पड़ जाएगा।

रिजल्ट के लिए लंबा इंतजार मुनासिब नहीं

सेंटरलाइज्ड कॉपी जांच कराने में पांच जनवरी तक प्रतीक्षा करनी होगी। प्रत्येक सत्र में पांच-पांच लाख यानी पंद्रह लाख कॉपियों की जांच अगर सेंटरलाइज्ड होने लगे तो ये कम से कम 182 दिन समय चाहिए। 14 परीक्षाओं का पिछला रिकॉर्ड बताता है कि किसी भी परीक्षा में कॉपी जांच 52 से 65 दिन से पहले कभी पूरी नहीं हो पाई है। क्या विश्वविद्यालय के लिए यह संभव है कि सेशन जहां पिछड़ रहा है, वहां इतना लंबा समय रिजल्ट के इंतजार में गंवा दिया जाए।  

Posted By: Ajit Kumar

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