मुजफ्फरपुर, जेएनएन। शौचालय और स्वच्छता के प्रति सचेत करते नारों से देश गूंज रहा। घर-घर शौचालय बनवाने की वकालत हो रही। वहीं, बीआरए बिहार विश्वविद्यालय के अधिकारियों के लिए यह मजाक से अधिक कुछ नहीं। विश्वविद्यालय के गणित विभाग में शौचालय की बदहाली देखकर शर्म आती है। यहां शौचालय इस्तेमाल करने के लिए छात्राओं को पहरेदार की तलाश करनी पड़ती है।

गणित विभाग के गर्ल्स कॉमन रूम से अटैच टॉयलेट अरसे से बदहाल है। इस कारण छात्राएं मजबूरन जेंट्स टॉयलेट ही इस्तेमाल करती हैं। हालांकि, इसकी भी हालत बहुत अच्छी नहीं है। शौचालय के दरवाजे अंदर से बंद नहीं होते, जिससे लड़कियों को उसके बाहर पहरेदार बैठाना पड़ता है। सालभर से अधिक समय से यह स्थिति है।

रजिस्ट्रार से की थी शिकायत

शौचालय की बदहाली की शिकायत 10 दिन पहले रमण कुमार, अविनाश कुमार सिंह, खुशबू कुमारी, सोनम कुमारी, चांदनी कुमारी, प्रेरणा कुमारी, मोनिका कुमारी, दीपा, सुप्रिया, पल्लवी और स्नेहलता आदि छात्र-छात्राओं ने रजिस्ट्रार से की थी। गल्र्स कॉमन रूम व शौचालय को दुरुस्त कराने की मांग की। सफाई के लिए कर्मचारी बहाल करने की गुहार लगाई। इसी तरह का आवेदन रजिस्ट्रार को नौ अगस्त को भी दिया गया था।

छात्र नेता ठाकुर प्रिंस का कहना है कि शौचालय की बदहाली विवि प्रशासन के व्यवस्था की पोल खोलती है। गल्र्स टॉयलेट के दरवाजे जंग खाकर बंद नहीं होते। इस कारण लड़कियों और लड़कों का शौचालय कॉमन यूज में आता है।

राज्यपाल के आदेश की अनदेखी

राज्यपाल ने गल्र्स कॉमन रूम के साथ पर्याप्त शौचालय व्यवस्था हर हाल में सुनिश्चित करने का आदेश दे रखा है। यहां तक कहा है कि जिन कॉलेजों में शौचालय की पर्याप्त व्यवस्था नहीं हो, उनकी मंजूरी के प्रस्ताव नहीं भेजे जाएं। इसके बाद भी विवि में यह स्थिति है।

 बीआरएबीयू विकास अधिकारी डॉ. आशुतोष सिंह ने बताया कि हां, यह बात जैसे ही संज्ञान में आई, रजिस्ट्रार ने तुरंत विश्वविद्यालय के कार्यपालक अभियंता राकेश कुमार को इस बारे में तलब किया गया। शौचालय व गल्र्स कॉमन रूम को दुरुस्त करने के लिए आदेश दे दिया गया है। बहुत जल्द नतीजे सामने होंगे। 

Posted By: Ajit Kumar