मुजफ्फरपुर, जेएनएन। सामान्य दिनों की तरह अंधेरा सूरज की लालिमा को अपने आगोश में समेट रहा था..! वहीं दूसरी ओर चंद्रमा अपनी चाँदनी से धरती को जगमग करने के लिए बेताब हो रहा था। लेकिन चांद की यह चमक साधारण नहीं थी। चौदहवीं की इस चांद को देखकर छह दशक पूर्व के इस गीत कि पंक्तियां 'चौदहवीं का चांद हो या अाफताब हो...' चरितार्थ हो रही थी। कहा गया है कि चौंदहवीं का चांद काफी आकर्षक हाेता है। पूर्णिमा को भले ही पूरा चांद दिखाई देने की मान्यता है पर चौदहवीं को चांद की चमक अनोखी होती है।

 इस संबंध में सायंस फॉर सोसाइटी के संस्थापक और जिला बाल विज्ञान कांग्रेस के समन्वयक डॉ.फुलगेण पूर्वे ने बताया कि यह खगोलीय घटना है। बता दें कि शाम में चांद दिखने के साथ ही यह चर्चा चारों ओर होने लगी की आज चांद बड़ा और ज्यादा चमक वाला है। डॉ.पूर्वे ने बताया कि चांद का स्वरूप बड़ा या छोटा नहीं होता। यह चक्कर लगाने के क्रम में जब पृथ्वी के निकट वाले हिस्से में होता है तो सामान्य दिनों की अपेक्षा बड़ा दिखाई दे सकता है। 

प्रदूषण कमने के कारण चांद में दिखी चमक 

डॉ.पूर्वे ने यह भी बताया कि चांद में अधिक चमक के पीछे यह कारण हो सकता है कि पिछले कई दिनों से देशभर में गाड़ियों और कल-कारखानों का संचालन नहीं हो रहा है। इस कारण प्रदूषण कम हो गया है। प्रदूषण के छोटे-छोटे कण हवा में तैरते रहते हैं तो आकाश साफ नहीं दिखाई देता। लेकिन, अभी प्रदूषण कमने के कारण अाकाश साफ दिखाई दे रहा है और इसी का प्रभाव है कि चांद में ज्यादा चमक देखने को मिल रहा है।

Posted By: Murari Kumar

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