मुजफ्फरपुर, जेएनएन। भारतीय संस्कृति में प्रत्येक शुभ कार्य के लिए समय निर्धारित है। मान्यता है कि शुभ घड़ी में शुरू किया गया कार्य अवश्य ही फलदायी एवं शुभकारी होता है। ऐसा भी समय होता है, जब शुभ कार्य वर्जित माने गए हैं। एक ऐसा ही काल खरमास है, जो धर्म व ज्योतिष शास्त्र में मांगलिक कार्यों के लिए उत्तम नहीं माना गया है।

सूर्य उपासना के साथ दान 

पंडित प्रभात मिश्र व रामदयालु स्थित मां मनोकामना देवी मंदिर के पुजारी पं.रमेश मिश्र बताते हैं कि खरमास या मलमास का संबंध सूर्य से है। इसलिए इन दिनों में सूर्य उपासना के साथ दान व धर्मादि का विशेष महत्व बताया गया है। शनिवार, 14 मार्च को सूर्य का मीन राशि में प्रवेश हो रहा है। इसलिए 14 मार्च से 13 अप्रैल तक खरमास रहेगा। कोई भी शुभ कार्य शुरू करना वर्जित होगा। इन दिनों में किए गए दान का विशेष फल मिलता है। खरमास के दौरान जितना संभव हो सके गरीबों, असहायों व जरूरतमंदों को दान करना चाहिए।

सूर्य मंत्रों का जप करें

सदर अस्पताल स्थित मां सिद्धेश्वरी दुर्गा मंदिर के पुजारी पं.देवचंद्र झा बताते हैं कि खरमास के दिनों में दान-पुण्य का विशेष महत्व बताया गया है। इन दिनों सुबह जल्दी जगने के बाद स्नानादि से निवृत्त होकर सूर्य को अघ्र्य दें और उनकी आराधना करें। सूर्य आदित्य स्त्रोत का पाठ और सूर्य मंत्रों का जप करें। गायों को हरा चारा खिलाएं, गौ सेवा करें और पक्षियों के दाना-पानी की व्यवस्था करें। इससे शुभ फल की प्राप्ति होती है।

ना करें ये कार्य

- नामकरण, मुंडन, विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, गृह निर्माण, नए कारोबार का प्रारंभ आदि कार्य। 

Posted By: Ajit Kumar

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