मुजफ्फरपुर, जेएनएन। बेरोजगारी को बढ़ावा देने में नोटबंदी का भी अहम योगदान था। बिना तैयारी के ये निर्णय लिया गया। इससे लघु व कुटीर उद्योग सर्वाधिक प्रभावित हुए। मार्केट में प्रोडक्ट की डिमांड घटने से उद्यमी पूंजी निवेश करने से डर रहे हैं। ये बातें इकोनॉमिक्स एसोशिएशन ऑफ बिहार की ओर से विवि के अर्थशास्त्र विभाग में आयोजित 20वें अधिवेशन के दूसरे दिन तकनीकी सत्र को संबोधित करते हुए अर्थशास्त्रियों ने कहीं। जयपुर से आए अर्थशास्त्री प्रो. सुबह सिंह यादव ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था हो गई है। यूएस रिसर्च इंस्टीट्यूट रिव्यू संस्थान की ओर से जारी एक रिपोर्ट के अनुसार अर्थव्यवस्था में भारत ने ब्रिटेन व फ्रांस को भी पीछे छोड़ दिया है। 

गिरती अर्थव्‍यवस्‍था पर पूछे प्रश्‍न

इकोनॉमिक ग्रोथ स्लो डाउन पर शोधार्थियों ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए। साथ ही अर्थशास्त्रियों ने इसके तकनीकी पक्षों की ओर ध्यान आकृष्ट कराया। इस सत्र की अध्यक्षता पं.रविशंकर विश्वविद्यालय जयपुर के प्रो.रवींद्र ब्रहमें ने की। इसमें पैनल में मेरठ से प्रो.अतवीर सिंह, बॉम्बे यूनिवर्सिटी मुंबई से डॉ.निशिकांत झा व नई दिल्ली से डॉ.शैलेश कुमार थे। इस सत्र में शोधार्थियों ने गिरती अर्थव्यवस्था पर प्रश्न भी पूछे। उनका विशेषज्ञों ने जवाब दिया। वहीं एक अन्य तकनीकी सत्र में सोशियो इकोनॉमिक आइडियाज ऑफ राजीव गांधी पर चर्चा हुई। इसकी अध्यक्षता डॉ.नागेश्वर शर्मा ने की। इस पैनल में डॉ.बैजनाथ सिंह व डॉ.रेवती रमन आदि थे।

शोधार्थियों ने प्रस्‍तुत किए शोध

अर्थशास्यिों ने कहा कि आइटी सेक्टर, बैंकिंग, तकनीक व ऑटोमोबाइल सेक्टर में अर्थव्यवस्था के विकास से मंदी से उबरा जा सकता है। राजीव गांधी ने भी इसी सोच के तहत तकनीकी क्रांति लाई थी। फेस एंड पैटर्न ऑफ डेवलपमेंट सत्र की अध्यक्षता प्रो.उपेंद्र साह ने की। इस पैनल में मध्यप्रदेश के डॉ.सुनील कुमार, पटना विवि के डॉ.सरोज सिन्हा थे। इसमें सात शोधार्थियों ने अपने पत्र प्रस्तुत किए। अधिवेशन के संयोजक डॉ.संजय कुमार ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था आनेवाले दिनों में तीव्र गति से विकास करेगी। साथ ये पंद्रह ट्रिलियन का लक्ष्य प्राप्त करेगी। धन्यवाद ज्ञापन डॉ.सीकेपी साही ने किया। इस सत्र के बाद डॉ.जितेंद्र कर्माकर मेमोरियल लेक्चर की अध्यक्षता उनके पुत्र असीम कर्माकर ने की। इसमें बीपी चंद्र मोहन, अनिल ठाकुर, डॉ.सीकेपी शाही, डॉ.संजय कुमार आदि थे।

असंगठित क्षेत्रों में तेजी से बढ़ी बेरोजगारी

छत्तीसगढ़ से आए अर्थशास्त्री डॉ.हनुमंत यादव ने कहा कि रोजगार उपलब्ध कराने में चुनौतियां बढ़ गई हैं। वर्तमान में संगठित क्षेत्र में मजदूरी दर भी ठीक है और जॉब भी सुरक्षित है। दूसरी ओर असंगठित या अनौपचारिक क्षेत्र में जॉब सुरक्षित नहीं है। जब चाहें हटा सकते हैं। इसमें रिटायरल बेनीफिट भी नहीं है। असंगठित क्षेत्रों में ही बेरोजगारी तेजी से बढ़ी है।

अब हम थ्री ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी की ओर अग्रसर

जयपुर से आए अर्थशास्त्री सुबह सिंह यादव ने कहा कि समावेशी विकास का जो आधुनिक स्वरूप हम देख रहे हैं, उसका बीज राजीव गांधी के समय बोया गया था। तकनीकी क्रांति में उनका अहम योगदान था। इसके अलावा सैम वित्रोदा उनके निकट सहयोगी थे। राजीव गांधी समाज के गरीब व वंचित लोगों को विकास की मुख्य धारा में जोडऩा चाहते थे। उनको राजनीतिक अर्थशास्त्री भी कहा जाता है। उन्होंने राजनीतिक व आर्थिक संस्थाओं की अंर्तनिर्भरता पर जोर दिया था। उनका उद्देश्य गरीब तबके को इस योग्य बनाना था कि वे अपनी योग्यता से आय का अर्जन कर सकें। इसके लिए उन्हें पर्याप्त अवसर भी मिलने चाहिए। उन्होंने गरीबी उन्मूलन व रोजगार सृजन के लिए कई कार्यक्रम चलाए। राजीव गांधी ने ही नए भारत का सपना देखा था। कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था हो गई है और अब हम थ्री ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी की ओर अग्रसर हैं।

आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रही भारत की अर्थव्यवस्था 

अमेरिका की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत फिर आत्मनिर्भरता की ओर चल पड़ा है। यूएस रिसर्च इंस्टीट्यूट रिव्यू संस्थान की ओर से बुधवार को एक रिपोर्ट जारी की गई। इसके अनुसार भारत की अर्थव्यवस्था पूर्व की बनाई गई आत्मनिर्भरता की नीतियों की ओर अग्रसर हो गई है। साथ ही भारत ने ब्रिटेन व फ्रांस को भी पीछे छोड़ दिया है।

इससे प्रभावित हो रही अर्थव्यवस्था

कानपुर से आए अर्थशास्त्री सह इंडियन इकोनॉमिक एसोशिएशन के अध्यक्ष डॉ. देवेंद्र अवस्थी ने कहा कि देश में 90 फीसद क्षेत्र ऐसा हैं जिनका रजिस्ट्रेशन नहीं है। इसके दो भाग हैं। इनफार्मल और अनऑर्गनाइज्ड सेक्टर। जैसे सड़क किनारे छोटी दुकान लगाने वाले लोगों की ओर कोई ध्यान ही नहीं दिया जा रहा, जबकि ये अर्थव्यवस्था का एक बहुत बड़ा हिस्सा हैं। यही सबसे ज्यादा प्रभावित भी होते हैं। नोटबंदी का असर छोटे दुकानदारों पर भी काफी पड़ा। बड़े-बड़े मॉल भी इन्हें प्रभावित करते हैं। अर्थव्यवस्था को ट्रैक पर लाने के लिए इन पर भी ध्यान देना जरूरी है। 

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