समस्तीपुर, जासं। शहर के मोहनपुर स्थित आरबी शर्मा हॉस्पीटल में शल्य चिकित्सा से महिला मरीज के बच्चेदानी में रसौली का सफल ऑपरेशन किया गया। स्त्री रोग विशेषज्ञ डा. मीनाक्षी ठाकुर ने चार किलोग्राम की रसौली भी निकाली। डा. मीनाक्षी ने बताया कि एक सप्ताह पूर्व शिवाजीनगर प्रखंड के बंडीहा गांव निवासी सीता देवी बहुत ही गंभीर हालत में आई थी। मरीज की शल्य प्रक्रिया से बच्चेदानी से रसौली निकालने की सफल सर्जरी की गई। उन्होंने बताया कि महिला की सर्जरी करके उसे एक दिन बाद ही चलने के लिए कह दिया गया है और तीन दिन बाद घर भेज दिया गया। ऑपरेशन में सर्जन डा. अभिषेक झा व डा. आरबी शर्मा ने सहयोग किया।

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क्या होती है रसौली

रसौली एक तरह की गांठ होती है, जो बच्चेदानी (यूट्रस) में फाइब्रस टिशूज से बनती है। महिलाओं का यूट्रस तीन भागों में बंटा होता है और यह यूट्रस के किसी भी हिस्से में हो सकती है। इसका साइज भी अलग-अलग हो सकता है। रसौली स्टोन्स से अलग होती है और यह केवल महिलाओं की सेहत से जुड़ी समस्या है। आमतौर पर हार्मोनल डिसबैलेंस होने के कारण बच्चेदानी में रसौली बनती है लेकिन सेहत संबंधी अन्य समस्याएं भी इसकी वजह हो सकती हैं। कई बार रसौली की समस्या हेरिडिटी की वजह से भी देखने को मिलती है। डा. मीनाक्षी ने बताया कि अत्याधुनिक पद्धति से सर्जरी चिकित्सा की गई।

कोरोना काल में अनाथ हुए बच्चों को वाहन से राशन

मुजफ्फरपुर : कोरोना के कारण जिले में अनाथ हुए बच्चों को वाहन से राशन उपलब्ध कराने की सुविधा शुरू कर दी गई है। जिलाधिकारी प्रणव कुमार ने समाहरणालय परिसर से इन वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। समाज कल्याण विभाग एवं केयर इंडिया की तरफ से बच्चों के लिए राशन सामग्री का वितरण किया जा रहा है।

जिले में कोरोना काल में 31 परिवार के बच्चे अनाथ हो गए हैं। इनमें से वैसे परिवार जहां पांच से कम बच्चे बच गए हैं उन्हें एक एवं जहां इससे अधिक बच्चे हैं वहां दो किट दी जाएंगी। साथ ही आने वाले समय में वैसे सभी बच्चों के लिए शिक्षा एवं अन्य जरूरतों की व्यवस्था की जाएगी। इससे वे मुख्यधारा में भी आ सकेंगे।

Edited By: Ajit Kumar