मुजफ्फरपुर, जासं। शारदीय नवरात्र में गुरुवार को मां आदिशक्ति के नवम स्वरूप मां सिद्धिदात्री की आराधना की गई। सुबह चार बजे से ही मंदिरों में महानवमी के पूजन के लिए भक्त मंदिर व आसपास के पूजा पंडालों में पहुंचने लगे। मां की पूजा-अर्चना के बाद महा आरती हुई। इसके बाद नवग्रह की लकड़ियों व अन्य सामग्री से हवन कर परम करुणामयी सिद्धिदात्री से सभी कार्य सिद्ध कर बाधाओं को समाप्त करने के साथ ही सुख व मोक्ष की प्राप्ति की कामना की गई। मां बगलामुखी मंदिर, मां राज राजेश्वरी मंदिर समेत सभी देवी मंदिरों में हवन के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटी। बताया जाता है कि नवमी पर मां के पूजन का विशेष महत्व होता है। इन दिन मां अपने भक्तों की नौ दिनों की आराधना से प्रसन्न हो मनोवांछित फल प्रदान करती हैं। जगदम्बा के इस स्वरूप के पूजन से महामारी, बाढ़, सूखा, प्राकृतिक उपद्रव से छुटकारा मिलता है व शत्रु से घिरे हुए राज्य, देश व संपूर्ण विश्व का कल्याण होता है। मां की खोईंछा भरने के लिए भी काफी संख्या में महिलाएं कतारों में खड़ी दिखीं। 

मंदिरों में कन्या पूजन कर मां के स्वरूपों की आराधना

शारदीय नवरात्र में अष्टमी और नवमी तिथि को कन्या पूजन का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि 9 दिनों तक चलने वाले इस महापर्व में कन्या पूजन से समस्त फलों की प्राप्ति होती है। मां आदिशक्ति कन्या पूजन से बेहद प्रसन्न होती हैं। गुरुवार को विभिन्न देवी मंदिरों व पूजा पंडालों में मां आदिशक्ति के नौ स्वरूपों में कन्या पूजन किया गया। सबसे पहले जजमान ने कन्याओं के पैर पखारे व उनकी आरती की गई। इसके बाद उन्हें भोजन करा उपहार देकर उनसे आशिर्वाद लिया गया। 

Edited By: Ajit Kumar