मुजफ्फरपुर, जेएनएन। हिंदी को राजभाषा का दर्जा दिए जाने की खुशी मनाने का दिन 14 सितंबर शनिवार को है। कॉलेजों से लेकर विभिन्न सरकारी संस्थाओं में हिंदी दिवस मनाए जाने की तैयारियों को अंतिम रूप दिया गया। अब लोगों को हिंदी में बोलने और अपने बच्चों को हिंदी माध्यम से पढ़ाने में परहेज नहीं हो रहा है। दूसरी भाषा के विद्वान भी हिंदी साहित्य को शौक से पढ़ते हैं। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान भी हिंदी ने पूरे देश को एकसूत्र में पिरोने के लिए संपर्क भाषा के रूप में काम किया था। देश की आजादी में हिंदी भाषा की महती भूमिका रही है। यह हमारी जिंदगी की भाषा है। 

 बीआरए बिहार विश्वविद्यालय के अंग्रेजी के विभागाध्यक्ष डॉ. एसके पाल ने कहा कि कक्षा में अंग्रेजी पढ़ाने के अलावा आम बातचीत हिंदी में ही करते हैं। उनको हिंदी बोलने और लिखने में गर्व होता है। अंग्रेजी का अध्ययन ज्ञान के लिए होता है। लेकिन, जीवन का आनंद हिंदी बोलने व पढऩे में है। वे जब विदेशों में जाते हैं तो लोगों को उनके हिंदी में बोलने पर खुशी होती है। वे भारत और हिंदी के बारे में अपनी जिज्ञासा रखते हैं।

 विवि के अनेक पदों पर कार्यरत रहे व वर्तमान में विश्वविद्यालय के रसायन विभाग के अध्यक्ष डॉ. अशोक श्रीवास्तव ने कहा कि अपने कार्यकाल में हिंदी में अधिक से अधिक काम कराया था। सारे पत्राचार हिंदी में करते थे। रसायन विज्ञान के अध्यक्ष के रूप मेंं कक्षा में छात्रों को अंग्रेजी के बजाय हिंदी में ही समझाते हैं।

 बीआरए बिहार विवि के भौतिकी विभाग के प्रोफेसर डॉ. ललन झा ने कहा कि लगातार उनके विभाग में हिंदी में अध्यापन हो रहा है। उनकी जीवन शैली में हिंदी शामिल है।

 एमडीडीएम कॉलेज की प्राचार्य डॉ. ममता रानी अंग्रेजी की विद्वान हैं और कविताएं हिंदी में लिखती हैं। हिंदी पठन-पाठन में खास रुचि है। हिंदी को लोकप्रिय बनाने के लिए कॉलेज में कार्यक्रम करती रहती हैं। हिंदी हमारी मां है। मां के बिना हम कहां रह सकते हैं?

 वैद्य ललन तिवारी कहते हैं कि उन्होंने अपने बच्चों को हिंदी और संस्कृत का अध्ययन कराया है। बच्चे हिंदी के बल पर आगे बढ़े हैं। उन्होंने कहा कि अच्छी अंग्रेजी बोलचाल पर ही ऊंचे ओहदे वाली नौकरी मिलने का भ्रम है। आज स्थिति यह है कि पब्लिक स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने के बावजूद लोगों के बीच वे हिंदी में ही बोलते और पढ़ते लिखते हैं। हिंदी की शक्ति को पहचान लेना समाज की सबसे बड़ी जरूरत है। 

Posted By: Ajit Kumar

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