मुजफ्फरपुर। अखंड सौभाग्य के लिए किया जाने वाला हरितालिका तीज व्रत 12 सितंबर को होगा। भाद्र शुक्ल तृतीया, बुधवार के दिन चित्रा नक्षत्र में यह व्रत रखा जाएगा, जिसमें महिलाएं अपने सुहाग के सुख- सौभाग्य व आरोग्यता के लिए माता गौरी की पूजा करेंगी। बाबा गरीबनाथ मंदिर के प्रधान पुजारी पं.विनय पाठक व हरिसभा चौक स्थित राधाकृष्ण मंदिर के पुजारी पं.रवि झा बताते हैं कि सुबह से शाम 6:45 बजे तक यह पूजा की जा सकेगी। इसी दिन मिथिलांचल का लोकप्रिय चौठचंद्र पर्व भी है। संध्या 6:45 बजे के बाद चौठ हो जाएगा। इसके बाद चंद्र पूजा होगी।

रामदयालु स्थित मां मनोकामना देवी मंदिर के पुजारी पं.रमेश मिश्र बताते हैं कि हरितालिका तीज पर्व सुहागिनों के लिए अहम माना गया है। इसमें पति की लंबी आयु के लिए सभी सुहागिनें निष्ठा के साथ व्रत रखती हैं। वे निर्जला व्रत रखते हुए भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी की पूजा करती हैं। कई कुंवारी कन्याएं भी यह व्रत करती हैं। सुहागिन महिलाओं को सालभर रहता हरितालिका का इंतजार

हरितालिका तीज व्रत बेहद कठिन माना गया है। इस दिन निर्जला रहकर गौरी शंकर की आराधना की जाती है। व्रत के पारण से पूर्व पानी की एक बूंद भी ग्रहण करना वर्जित है। मान्यता है कि तीज व्रत करने से पति की उम्र लंबी और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है, विवाहयोग्य कुंवारी कन्याओं को मनचाहा वर मिलता है। हिन्दू धर्म की महिलाओं में इस पर्व का विशेष महत्व है। इस व्रत को सुहागिन महिलाएं और कुंवारी कन्याएं रखती हैं, लेकिन एक बार व्रत रखने के बाद जीवन भर इस व्रत को रखना पड़ता है। व्रत के दिन भजन-कीर्तन चलता रहता है।

- पूनम देवी, तीन पोखरिया, सुंदरबाग

इस व्रत में सोने की मनाही है। यहां तक कि रात को भी सोना वर्जित है। रात्रि जागरण करते हुए भजन-कीर्तन किया जाता है। व्रत करने वाली महिला गलती से भी कुछ खाती-पीती नहीं।

- कुमारी नीतू, मिठनपुरा

सुहागिन महिलाओं को हरितालिका तीज का सालभर इंतजार रहता है। पूजा प्रदोष काल में की जाती है। महिलाएं स्नानादि कर नए वस्त्र पहनती हैं और सोलह श्रृंगार करती हैं।

- नीलू सिंह, आमगोला पड़ाव पोखर

इस दिन महिलाएं खासतौर पर लाल या हरे रंग के कपड़े पहनती हैं। एक दिन पहले ही हाथों में मेहंदी लगा लेती हैं, ताकि मेहंदी अच्छी तरह रच जाए। दिनभर व्रत रखने के बाद शाम को शिव-पार्वती की पूजा की जाती है।

- प्रमिला कुमारी, चंदवारा

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