मुजफ्फरपुर :मनुष्य में दृढ़ निश्चय व साहस हो तो कोई भी कार्य नामुमकिन नहीं है, बशर्ते काम समाज हित राष्ट्रहित का हो। जिस तरह माह बली हनुमानजी लंका जाने में समुद्र को तब लाघ गए जब जामवंत ने उन्हें अपनी शक्ति का एहसास कराया। उक्त बातें सोमवार को मुशहरी प्रखंड के शेरपुर शिव मंदिर प्रांगण में आयोजित हनुमान कथा में कथावाचक प्रदीप भैया ने कहीं। उन्होंने रामायण के सुंदर काड के प्रवचन को प्रमाणिकता के साथ कहा कि जब महावली हनुमान भगवान श्रीराम का नाम लेकर समुद्र लाघ सकते हैं तो हम मनुष्य होकर श्रीराम का नाम लेकर संसार रूपी वैतरणी क्यों नहीं पार कर सकते। उन्होंने कहा कि किसी भी कार्य के लिए भगवान से ये नहीं कहें कि अमुक कार्य हो जाएगा तो ये करेंगे वो करेंगे ,बल्कि उनके भजन में और मन लगाएं। कभी भी पूजा-पाठ या भजन करते हुए अपने मन मष्तिष्क को केंद्रित रखें, तभी आपके द्वारा किए गए सत्कार्य की आवाज प्रभु श्रीराम तक पहुंच पाएगी, अन्यथा दिन भर माला जपने से भी कोई लाभ नहीं होगा। जिस भी व्यक्ति में स्वामी भक्ति होती है भगवान हमेशा अपनी आशीर्वाद उस व्यक्ति पर बनाए रखते हैं। बस आवश्यकता होती है अपने अंतर्मन से उसे समझने की। जिस तरह लंका का नाश होना तय था ,इसका आभाष रावण को भी था लेकिन रावण अपने परिवार समेत वैकुंठ जाना चाहता था। इसीलिए उसने मां जानकी को छल से उठा लाया। यह नियति व विधि का विधान था जो हुआ। इसलिए नियति द्वारा निर्धारित विधि के विधान को रोका नहीं जा सकता है। हां अपने कर्म से कुछ कम अवश्य किया जा सकता है। कथा में मनीष कुमार, नरेश प्रसाद, मुकेश कुमार, मुकुल कुमार, सोनू कुमार सक्रिय रहे।

Posted By: Jagran

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