मुजफ्फरपुर, {गोपाल तिवारी}। हाजीपुर-सुगौली रेललाइन परियोजना 16 साल में भी पूरी नहीं हो सकी। 10 अलग-अलग स्थानों पर रैयतों की आपत्ति इसमें रोड़ा है। परियोजना पूरी होने से वैशाली, केसरिया, अरेराज और सुगौली के प्रसिद्ध बौद्ध स्थल जुड़ जाएंगे। सात सितंबर को आई रेलवे की स्थायी संसदीय समिति को रेल अधिकारियों ने इसकी जानकारी दी थी। इस पर समिति के अध्यक्ष पूर्व केंद्रीय मंत्री राधामोहन स‍िंह ने रेल अधिकारियों को जल्द मसला सुलझाने को कहा है, ताकि लोगों को इसका लाभ मिल सके।

पूर्व मध्य रेलवे के सोनपुर रेल मंडल में हाजीपुर-सुगौली रेललाइन परियोजना की स्वीकृति रेल मंत्रालय से 2003-04 में मिली थी। इसमें देरी होने का मुख्य कारण भूमि अधिग्रहण और इसे रेलवे को अंतिम रूप से सौंपे जाने में विलंब है। 2005 से भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की गई। रेलवे ने भूमि की लागत संबंधित जानकारी राज्य प्राधिकरण को समय पर दे दी। इसके बाद भी भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में विलंब किया गया। रेल अधिकारियों का कहना है कि भूमि अधिग्रहण पूर्ण होने के 30 महीने बाद परियोजना पूरी तरह से चालू कर दी जाएगी।

चार गुनी बढ़ गई लागत

हाजीपुर-सुगौली रेललाइन की प्रारंभिक स्वीकृत लागत 528.65 करोड़ रुपये थी। अब यह बढ़कर 2066.78 करोड़ रुपये हो गई है। अधिग्रहण में देरी से भूमि की लागत 115 करोड़ से बढ़कर 999 करोड़ रुपये हो गई है। श्रम और सामग्री की लागत 251 करोड़ रुपये तक और बढ़ गई। इसके अलावा समपार फाटकों को हटाने के लिए भराई का कार्य एवं रेलवे अंडर ब्रिज की संख्या में बढ़ोतरी से 194 करोड़ रुपये लागत बढ़ गई। इसके अलावा सामग्री संशोधन से 280.65 करोड़ रुपये की वृद्धि हुई, जिसमें विद्युतीकरण कार्य 183.41 करोड़ रुपये शामिल है।

इन इलाकों को मिलेगा लाभ

यह लाइन वैशाली, केसरिया, देवरिया, अरेराज और सुगौली के प्रसिद्ध बौद्ध स्थलों को जोड़ेगी। पर्यटन के दृष्टिकोण से अपने महत्व के अलावा, यह लाइन कई माल शेडों के माध्यम से सीमेंट, खाद्यान्न, उर्वरक, पत्थर के चिप्स आदि की स्थानीय आबादी की जरूरतों को भी पूरा करने में सक्षम होगी। हाजीपुर और सुगौली के बीच यह सीधा संपर्क मार्ग होगा। यह मुजफ्फरपुर यार्ड पर मालगाडिय़ों के दबाव को कम करेगा, जिससे मुजफ्फरपुर-वाल्मीकिनगर के व्यस्त रेलखंड पर गति में सुधार होगा। वीरगंज (नेपाल) केंद्रित यातायात को भी गति मिलेगी।