मुजफ्फरपुर। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को गणेश चतुर्थी के नाम से जाना जाता है। इस दिन ऋद्धि-सिद्धि केदाता भगवान गणेश की पूजा शुरू होती है। यह उत्सव 13 से 23 सितंबर तक मनेगा। खास बात यह है कि पहले दिन गुरु स्वाति योग भी बन रहा है। ज्योतिषविदों के मुताबिक, ये दुर्लभ और शुभ योग है। करीब 120 वर्ष के बाद ऐसा संयोग बनने जा रहा है।

हरिसभा चौक स्थित राधाकृष्ण मंदिर के पुजारी पं.रवि झा बताते हैं कि इस योग में भगवान गणेश की मूर्ति को प्रतिष्ठापित कर पूजा करना अति शुभ है। इस दिन बृहस्पतिवार होने से यह देवताओं के गुरु का दिन है। इसलिए इस नक्षत्र और वार में गणपति की स्थापना करने से घर-परिवार में सुख समृद्धि का वास होता है। शुभ नक्षत्र में गणपति का आगमन सर्वत्र शुभ फल देने वाला माना गया है। भगवान गणेश ऋद्धि-सिद्धि प्रदान करते हैं। बृहस्पति ज्ञान प्रदान करते हैं। इस दृष्टि से ज्ञान व बुद्धि के संतुलन में सिद्धि मिलेगी। वहीं, गुरु स्वाति योग में मनाए जाने वाले दस दिवसीय गणेशोत्सव में विधिवत पूजा करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होगी।

ज्योतिषविद् विमल कुमार लाभ बताते हैं कि 27 नक्षत्रों में स्वाति नक्षत्र का स्थान 15वा है। इसे शुभ और कार्यसिद्ध नक्षत्र माना गया है। इस नक्षत्र के अधिपति देवता वायुदेव होते हैं। इस नक्षत्र के चारों चरण तुला राशि के अंतर्गत आते हैं, जिसका स्वामी शुक्र है। शुक्र धन, संपदा, भौतिक वस्तुओं और हीरे का प्रतिनिधि ग्रह है। सत्संग से जागृत होता विवेक

जीवन की सफलता तब है, जब हम सत्संग में शामिल होते हैं। सत्संग से हमारा विवेक जागृत होता है। इसलिए निरंतर सत्संग का आश्रय लेना चाहिए। ये बातें सोमवार को श्री हरि कृपा सेवा एवं सत्संग समिति की ओर से भगवानपुर गुमटी स्थित महावीर मंदिर के प्रांगण में शुरू हुई श्रीराम कथा के पहले दिन कथावाचक श्री रामदासाचार्य जी महाराज ने कहीं। कहा कि जब भगवान की कृपा होती है, तभी सत्संग मिलता है। कथा में श्याम सुन्दर ठाकुर, बलराम प्रसाद सिंह, शोभा देवी, सुरेन्द्र कुमार द्विवेदी, जयलाल पासवान आदि शामिल हुए।

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