मुजफ्फरपुर, [अमरेन्द्र तिवारी]। मुजफ्फरपुर के औराई व कटरा प्रखंडों के बड़ी संख्या में किसान खेती से वंचित हो रहे हैं। कारण गुरहन घास है, जो कई हेक्टेयर तक फैल चुकी है। दरअसल, 2007 में आई बाढ़ से बचाव के लिए यहां बांध बनना शुरू हुआ। बांध बनने के बाद इसकी मिट्टी में विदेशी घास गुरहन उग आई। आज यह घास बड़े क्षेत्र में फैल चुकी है। किसान लाख कोशिश के बाद भी इससे मुक्ति नहीं पा सके। उनके खेतों में घास का जंगल बन गया है। अनाज की पैदावार नहीं होती, साथ ही खेत नीलगाय आदि का बसेरा हो गया है। 

 बांध बनने के बाद इसकी मिट्टी में गुरहन घास पहले तो करीब एक कट्ठा के प्लॉट में फैली। उसके बाद गर्मी के महीने में गुरहन में फूल और फिर बीज आए। तेज हवा में जिस दिशा में फूल, बीज गए वहां गुरहन पसरती चली गई। अब तो यह तकरीबन करीब 19 किलोमीटर यानी पांच हजार हेक्टेयर रकवा में फैल चुकी है। खेतों में अनाज नहीं उपजते। वहीं, दूसरी ओर इस जंगल में जंगली सूअर, नीलगाय आदि का बसेरा हो चुका है। ये पशु भी खेती को नुकसान पहुंचाने के लिए ही जाने जाते हैं। 

इन गांवों की खेती हुई तबाह 

बेनीपुर के किसान राजेन्द्र सिंह बताते है कि गुरहन से दर्जनों गांवों के किसान तबाह हैं। कटौंझा से लेकर कटरा सीमा तक बांध के किनारे बसे जनार, बसंत, मटिहानी, फतहपुर, बेरौना, सरहचिंया, मधुबन प्रताप, करहटी, पटोरी, हंसबारा, अतरार, माधोपुर, महुआरा, बाड़ा बुर्जुग, बारा खुर्द, चैनपुर, महेशबारा, बेनीपुर, जीवाजोर, शंकरपुर, कीरथपुर, भरथुआ, कल्याणपुर, बेशी, उतरी, नया गांव, हरणी टोला, बभनगांवा पूर्वी व पश्चिमी, चउंटा, जोंकी, सुन्दरखोली, बसुआ, कटरा, धनौर, शिवदासपुर, बसंत, बिसौथा, डुमरी गांव के किसान प्रभावित हैं। यहां धान, मक्का, सरसों, तोरी व सब्जियों की भरपूर फसल होती थी। गुरहन ने सब लील लिया। 

इस बारे में जिला कृषि पदाधिकारी मुजफ्फरपुर डॉ. के के वर्मा ने कहा‍ कि  'गुरहन के संबंध में प्रखंड स्तर से रिपोर्ट ली जाएगी। जमीन को फिर से कृषि योग्य बनाने की पहल होगी।'

Posted By: Ajit Kumar

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