मुजफ्फरपुर, जेएनएन। बैंकों में लूट की घटनाएं बढ़ गई हैं। शहर से लेकर गांव तक की बैंकों पर अपराधियों की नजर है। इसके बाद भी अधिकतर बैंकों की सुरक्षा सीसी कैमरे व अलार्म के भरोसे है। शहर के 50 फीसद बैंक शाखाओं में सुरक्षा गार्ड नहीं है। ग्रामीण क्षेत्रों का बुरा हाल है। ग्रामीण क्षेत्रों की अधिकतर शाखाएं गार्ड विहीन हैं। इसका लाभ अपराधी उठा रहे हैं। वहीं बैंककर्मी भी दहशत में काम करने को विवश हैं।

पुलिस-प्रशासन की लापरवाही

सुरक्षा को लेकर बैंक प्रबंधन व पुलिस-प्रशासन लापरवाही बरत रहे हैं। बैंक अतिरिक्त खर्च से बचना चाहती है तो पुलिस अपनी डयूटी में लापरवाही बरतती है। नियमानुसार संबंधित थाने को बैंक कार्य अवधि में जाकर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेना है। बैंकों के रजिस्टर में यह अंकित होता है। मगर अधिकतर थाने की पुलिस रजिस्टर में अंकित कर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर रही है।

रात्रि गश्ती को लेकर भी पुलिस द्वारा लापरवाही बरती जा रही है। कई ग्रामीण बैंकों में अलार्म तक की व्यवस्था नहीं है। ग्रामीण क्षेत्रों की शाखाएं सुरक्षा की दृष्टि से बेहद संवेदनशील हैं। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के इरादे से सरकार ने बैंकों को सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी शाखाएं खोलने का निर्देश दिया है।

मगर जिस तरह से बैंक लूट की घटनाएं बढ़ रही हैं उसके बाद इस पर संदेह है। सुरक्षा को लेकर एसएसपी व बैंकर्स के बीच कई बैठकें हो चुकी है। उसके बाद भी सुरक्षा को लेकर पुख्ता इंतजाम नहीं हो सके।

बैंक प्रबंधन सुरक्षा पर नहीं खर्च

सुरक्षा को लेकर बैंक प्रबंधन भी लापरवाही बरत रही है। बैंक सुरक्षा गार्ड नहीं रख रही। इसका नतीजा यह है कि अधिकतर बैंक गार्ड विहीन है। ग्रामीण क्षेत्र सुरक्षा को लेकर पूरी तरह नजरअंदाज है। उन्हीं बैंकों में गार्ड की व्यवस्था है जो संवेदनशील है। अग्रणी जिला प्रबंधक डॉ. एनके सिंह ने कहा कि बैंक लूट की बढ़ती घटनाएं चिंताजनक है। बैंकर्स दहशत में है। इस मुद्दे को कई बार मजबूती से वरीय पुलिस अधीक्षक के सामने रखा गया। मगर अब तक कोई ठोस पहल हीं हुई।  

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