मुजफ्फरपुर, जेएनएन।  सरकार की बच्चों को पौष्टिक आहार देने की योजनाएं विचाराधीन हैं। स्कूलों में जहां मिड डे मील में बच्चों को दूध देने की योजना प्रस्तावित है। वहीं शुक्रवार को अभी अंडा या फल दिया जा रहा है। वहीं, कृषि विज्ञान केंद्र में गरीब शिशुओं को पौष्टिक आहार देने की योजना पर रिसर्च चल रहा है।

बच्चों को कुपोषण के बचाने के लिए जिले के 3045 विद्यालयों में दोपहर का भोजन दिया जाता है। गुणवत्ता पर विशेष ध्यान रखा जाता है। खास बात यह है कि प्रत्येक शुक्रवार को अंडा खाने को दिया जाता है, जो बच्चे अंडा नहीं खाते हैं, उन्हें कोई एक फल दिया जाता है। प्रशासन से लेकर शासन तक प्राथमिक स्कूलों में मिड डे मील योजना की जांच कराई जाती है। गड़बड़ी पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई होती है।

उधर, गरीब परिवारों के बच्चों को बाजार में प्रचलित ब्रांडेड कंपनियों के पोषाहार नहीं मिल पाते हैं। लेकिन, अब कुपोषण के खिलाफ जंग में ऐसे परिवारों के शिशुओं को स्वास्थ्यवद्र्धक आहार दिया जाएगा। इसकी तैयारी कृषि विज्ञान केंद्र (केवीसी), सरैया ने की है, जो नए उत्पाद का ट्रायल कर रहा है। इसके तहत एक से दो साल के शिशुओं के लिए नई तकनीक से पोषाहार तैयार किया जाएगा।

शिशुओं में कुपोषण की समस्या बेहद गंभीर है। खास तौर से गरीब परिवारों के शिशुओं में पोषण तत्वों की कमी से ही खतरनाक बीमारियां आक्रमण करती हैं। उदाहरण के लिए जिले के पांच प्रखंड में इसी कुपोषण के कारण एईएस जैसी बीमारी का प्रकोप होता है। सरकार जिले के चिह्नित पांच प्रखंडों के गरीब परिवारों को जीवन स्तर को बेहतर करने का प्रयास कर रही है।

कृषि विज्ञान केंद्र ने दो तरह के आहार तैयार किए हैं। पहला भुने हुए साधारण मक्के का आटा 60 ग्राम के साथ चने का आटा 20 ग्राम तथा 20 ग्राम चीनी के साथ आधा कप दूध मिलाकर पाउडर बनेगा। दूसरे प्रकार के आहार मेंं माल्टेड क्वालिटी प्रोटीन मक्के का आटा 50 ग्राम के साथ अंकुरित मूंग को सूखाने के बाद भून कर आटा करीब 25 ग्राम आटा के साथ भुना हुआ तिल 10 ग्राम, 15 ग्राम चीनी के साथ आधा कप दूध मिलाकर पाउडर बनाया जाएगा।  

इस बारे में मिड डे मील की डीपीओ शर्मिला राय ने कहा कि इसके तहत अब बच्चों को प्रतिदिन दूध देने की भी योजना है। इस संबंध में मुख्यालय स्तर पर गंभीरता से विचार चल रहा है। जल्दी ही केंद्र सरकार को इस आशय का प्रस्ताव भेजा जाएगा। वहीं कृषि विज्ञान केंद्र, सरैया की प्रभारी डॉ. अनुपमा ने कहा कि 'गरीब परिवारों के शिशुओं को पौष्टिक आहार देने की योजना पर रिसर्च चल रहा है। एक माह बाद रिसर्च का रिजल्ट जा जाएगा। तब एईएस पीडि़त बच्चों को यह आहार उपलब्ध कराया जाएगा। 

 

Posted By: Ajit Kumar

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