मधुबनी [विनय पंकज]। इनकी जंग है अंधविश्वास के खिलाफ। इसे लेकर लोगों को विज्ञान के माध्यम से जागरूक करते हैं। ढोंगी बाबाओं से बचाने का काम करते हैं। डेढ़ दशक से इस काम में लगे हैं मधुबनी शहर की जेपी कॉलोनी, सूरतगंज, वार्ड-14 निवासी मंटू कुमार। इसके लिए वे दर्जनों पुरस्कार पा चुके हैं।

मंटू बताते हैं कि पिता रामभूषण मंडल का ज्योतिष और तंत्र-मंत्र में गहरा विश्वास था। एक बार उन्होंने सपने में देखा कि लॉटरी का टिकट खरीदने पर वे धनवान बनने वाले हैं। फिर क्या था लॉटरी खेलने लगे। इसकी ऐसी लत लगी कि गांव की जमीन तक बिक गई। इस घटना ने ऐसा असर डाला कि अंधविश्वास के खिलाफ लड़ाई लडऩे की ठान ली।

सक्सेस साइंस फॉर सोसाइटी का गठन

2006 में 21 युवाओं के साथ मिलकर 'सक्सेस साइंस फॉर सोसाइटी' का गठन किया। इसका लक्ष्य रखा, विज्ञान के माध्यम से भ्रांतियां दूर करना। इसके जरिए मंटू जगह-जगह विज्ञान मेला व नुक्कड़ नाटक के अलावा कथित चमत्कारों की असलियत उजागर कर लोगों को जागरूक करते हैं। इतना ही नहीं स्वच्छता अभियान, बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ व नारी स्वावलंबन का भी काम करते हैं।

मिलकर उठाते हैं खर्च

मंटू अपने साथियों के साथ बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, मध्य प्रदेश, ओडिशा, दिल्ली, हरियाणा और मिजोरम में विज्ञान जागरूकता मेला लगा चुके हैं। जीविका सलाहकार पद पर कार्यरत मंटू इस अभियान में लगने वाले खर्च का वहन साथियों के साथ मिलकर खुद उठाते हैं।

गुरु ने दिखाई राह

एमकॉम तक की शिक्षा पाए मंटू बताते हैं कि वे वर्ष 2006 में मंगलौर के इंडियन रैशनलिस्ट एसोसिएशन के प्रेसिडेंट और मेडिकल कॉलेज के अवकाश प्राप्त प्रोफेसर डॉ. नारेंद्र नायक के संपर्क में आए। उन्होंने विज्ञान के प्रति अभिरुचि बढ़ाते हुए चमत्कारों की वैज्ञानिकता पर प्रशिक्षित किया। अब मंटू लोगों को बताते हैं कि कील को जीभ के आर-पार कर लेने वाले बाबा दरअसल अपनी जीभ में यू आकार की कील भी फंसाए रहते हैं।

सड़क किनारे ग्रह-नक्षत्रों को वश में करने वाली अंगूठी बेचने वाले चूने के पानी में उस पत्थर को डुबोए रहते हैं। लोगों को चकित करने के लिए अंगुली में चालाकी से फिनोथिलीन नामक केमिकल लगाए रहते हैं। इसके संपर्क में जैसे ही पत्थर आता है, खून जैसा लाल रंग निकलता है। इससे लोगों को लगता है कि वह पत्थर चमत्कारी है। इसी तरह अन्य चमत्कारों की कलई विज्ञान के जरिए खोलते हैं।

लोगों की सोच बदली

मधुबनी के चकदह निवासी अमित कुमार चौधरी बताते हैं कि एक बार इन्हें वाहन खरीदना था। वे शुभ मुहूर्त की तलाश में थे। उसी बीच उन्होंने मंटू का प्रदर्शन देखा तो उनका भ्रमजाल टूटा। बगैर मुहूर्त खरीदा वाहन काफी फलदायी रहा। इसी तरह महाराजगंज मोहल्ले के बेचन साह के बेटे को एक बार सांप ने काट लिया।

लोग झााड़-फूंक के चक्कर में पड़े थे। मंटू ने परिजन को समझाया और बच्चे को सदर अस्पताल ले गए। जब डॉक्टर ने बताया कि समय रहते बच्चे को अस्पताल लाने के कारण जान बची तो परिजन को अपनी भूल का एहसास हुआ।

मिले हैं कई पुरस्कार

मंटू को वर्ष 2006 में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के हाथों भारत स्काउट गाइड का राष्ट्रपति पुरस्कार, नेहरू युवा केंद्र मधुबनी का जिला युवा क्लब पुरस्कार, वर्ष 2012 में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में राष्ट्रीय विज्ञान प्रदर्शनी के मौके पर प्रसिद्ध वैज्ञानिक प्रो. यशपाल के हाथों पुरस्कार, 2015 में राष्ट्रीय एकता शिविर मिजोरम में नेहरू युवा केंद्र मिजोरम के जोनल डायरेक्टर एसआर विष्णोई के हाथों पुरस्कार, 2008 में सूचना और प्रसारण मंत्रालय के गीत एवं नाटक प्रभाग के निदेशक एन नवचंद्र सिंह के हाथों पुरस्कार, 2008 में ही धनबाद में आयोजित सातवें राष्ट्रीय बाल अधिकार अधिवेशन में चेयरमैन डॉ. जेवी कुलकर्णी के हाथों पुरस्कार, राज्य शिक्षा शोध द्वारा आयोजित 30वें जवाहर लाल नेहरू बाल विज्ञान प्रदर्शनी में निदेशक रवींद्र राम के हाथों पुरस्कार, अहमदाबाद में अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में पुरस्कार, कन्याकुमारी में सूर्यग्रहण कैंप में वैज्ञानिक बीके त्यागी के हाथों पुरस्कार।

अपनी सांस्कृतिक विरासत अक्षुण्ण रखने में कोई नुकसान नहीं है। नुकसान तब होता है जब लोग चमत्कारी बाबाओं के ढोंग, दकियानूसी परंपराओं के चक्कर में पड़ते हैं। मंटू जैसे युवा समाज को नई राह दिखा रहे हैं।
-प्रो. नारेंद्र नायक,
प्रेसिडेंट, इंडियन रैशनलिस्ट एसोसिएशन, मंगलौर

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