दरभंगा, जागरण संवाददाता। दरभंगा जंक्शन ब्लास्ट में चार संदिग्धों की खोज चार राज्यों में की जा रही है। इन सबकी तस्वीर बिहार, झारखंड, यूपी और तेलंगाना एटीएस को जारी की गई है। सूत्रों की माने तो इन राज्यों में सभी की खोज में ताबड़तोड़ छापेमारी की जा रही है। इसमें कई इनपुट भी मिलें हैं। लेकिन, गिरफ्तारी में सफलता नहीं मिल पाई है। पुलिस मुख्यालय सूत्रों के मुताबिक जांच में काफी सफलता मिली है। जांच सही दिशा में चल रही है। राज्य की कई एजेंसियां सहित टेक्निकल सेल भी इस मामले में काम कर रही है। बहुत जल्द मामले का पर्दाफाश कर दिया जाएगा।

जांच सूत्रों अनुसार सिंकदराबाद स्टेशन के बाहर जिन हाईप्रोफाइल टैक्सी नंबर कार से उतरे चारों संदिग्धों की पहचान स्थानीय स्तर पर नहीं हो पाई है। ऐसी स्थिति में आशंका जताई गई है सभी दूसरे प्रांत का हो। यही कारण है कि जहां-जहां से इस मामले में कनेक्शन मिला है वहां सभी की तलाश की जा रही है। बता दें कि दरभंगा जंक्शन पर जिस तरह के कपड़े का बोरा (गांठ) में केमिकल का बोतल ब्लास्ट किया ठीक उसी तरह का सामान सिकंदराबाद स्टेशन के बाहर कार से चार संदिग्धों को उतारते सीसी कैमरे में देखा गया है। ऐसी स्थिति में इन चारो की गिरफ्तारी अहम मानी जा रही है।

ब्लास्ट का चार राज्यों से जुड़ गया कनेक्शन :

दरभंगा जंक्शन ब्लास्ट मामले का चार राज्यों से कनेक्शन जुड़ गया है। पहला बिहार के दरभंगा में ब्लास्ट होना। दूसरा ब्लास्ट होने वाला पार्सल तेलंगाना के सिंकदराबाद से दरभंगा पहुंचा। तीसरा पार्सल भेजने वाला व प्राप्त करने वाले में एक ही नाम सुफियान का आया, यह नाम झारखंड के चतरा चर्चित नाम है। यह सुफियान एनआईए (राष्ट्रीय जांच एजेंसी) का वांटेड है। चौथा राज्य यूपी है जहां से इस मामले का तार जुड़ा है। पार्सल पर जिस मोबाइल नंबर का इस्तेमाल किया गया है, वह यूपी के चर्चित शामली से जारी है।

जांच में कई चीजें मिली फर्जी :

ब्लास्ट मामले में अब तक कई चीज फर्जी पाए गए हैं। पार्सल भेजने वाले और प्राप्त करने वाले एक ही नाम है, यह फर्जी है पहले ही स्पष्ट हो चुका है। वहीं जिस मोबाइल नंबर का इस्तेमाल किया वह भी फर्जी पाया गया है। जांच में मोबाइल धारक का कोई कनेक्शन अबतक नहीं मिल पाया है। पैन कार्ड कोई रिकार्ड नहीं मिल पाया। सूत्रों की माने तो अब सिंकदराबाद स्टेशन पर जिन कार से संदिग्धों को उतरते और बोरा (गांठ) को उतारते देखा गया उस कार का नंबर भी फर्जी बताया जा रहा है। ऐसी स्थिति में जांच एजेंसी की परेशानी बढ़ गई है।

Edited By: Murari Kumar

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