पटना [जेएनएन]। उत्तर बिहार और सीमांचल की बाढ़ से आठ दिनों बाद भी निजात नहीं मिली है तो वहीं गंगा में भी उफान जारी है। साथ ही, बूढ़ी गंडक में उफान और तीन पुलियों के टूटने से मुजफ्फरपुर शहर पर बाढ़ का खतरा गहरा गया है।

कटिहार भी खतरे से बाहर नहीं है। हालांकि अन्य जगहों पर नदियों का जलस्तर ढलान की ओर है। बाढ़ की वजह से मरने वालों की संख्या 368 हो गई है। 

एक ओर जहां सीमांचल इलाके में बाढ़ की स्थिति में कुछ सुधार हुआ है तो वहीं अब उत्तर बिहार में नदियां कहर बरपा रही हैं। मुजफ्फरपुर में बागमती व बूढ़ी गंडक के कहर से पूरा जिला बाढ़ की चपेट में आ गया है। सोमवार देर रात छोटी कोठिया में पुलिया के ध्वस्त होने से शहर के पूर्वी भाग में बाढ़ आ गई।

निगम क्षेत्र के कन्हौली विशुनदत्त, बीएमपी व मालीघाट में बूढ़ी गंडक का पानी प्रवेश कर गया है। जिस रफ्तार से पानी का बहाव हो रहा उससे कई और मोहल्लों के इसकी चपेट में सुबह तक आने की आशंका है। पुलिया टूटने की सूचना मिलते ही लोग घरों से बाहर निकल आए।

निचले इलाके के लोग सामान लेकर ऊंची जगह की ओर पलायन करने लगे हैं। प्रशासन ने अलर्ट जारी कर दिया है। वहीं बोचहां की बिशनपुर जगदीश पंचायत का गुढ़मी रिंग बांध भी टूट गया। इससे गुढ़मी गांव में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार को भी बाढ़ से संबंधित विभागों के प्रमुखों के साथ बैठक करके ग्राउंड रिपोर्ट ली। 

बाढ़ की वजह से मौत का आंकड़ा तीन सौ के पार 

राज्य सरकार के आंकड़ों के मुताबिक 2008 की विनाशकारी बाढ़ के बाद पहली बार डूबकर मरने वालों की संख्या तीन सौ के पार पहुंची है। पिछले वर्ष भी 33 जिलों में आई बाढ़ से इतनी मौतें नहीं हुई थीं। इस वर्ष बाढ़ लाने वाली बड़ी नदियों में आठ-दस दिनों की उफान में ही जानमाल को भारी नुकसान पहुंचा है।

 

राज्य सरकार के प्रारंभिक आकलन के मुताबिक पिछले वर्ष तीन चरणों में आई 33 जिलों में बाढ़ से भी इतनी क्षति नहीं हुई थी, जितनी इस बार हुई है। अभी तक 368 के मरने की खबर है। जबकि आपदा प्रबंधन विभाग ने 304 की पुष्टि भी कर दी है। 

 

सीमांचल में अब कम हो रहा पानी

कटिहार के कुछ इलाकों को छोड़ दें तो पूर्वी बिहार, कोसी और सीमांचल इलाके में पानी अब उतर रहा है, किंतु राहत का इंतजार बरकरार है। पीडि़तों में आक्रोश भी। सुपौल में कोसी का उतार-चढ़ाव और किनारों का कटाव जारी है। सहरसा में पानी ढलान पर है। मधेपुरा के गांव बाढ़ से उबरने लगे हैं पर राहत नहीं मिलने के कारण गुस्सा बढ़ रहा है। पूर्णिया और किशनगंज में पानी घट रहा है। 

 

कटिहार में स्थिति यथावत 

महानंदा का जलस्तर नीचे जा रहा है। गंगा स्थिर है। कोसी में मामूली वृद्धि है। कुछ इलाकों से पानी उतरना शुरू हो गया है। मनिहारी और अमदाबाद में बाढ़ के पानी का फैलाव जारी है। खगडिय़ा में बागमती और कोसी अभी भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। हालांकि गंगा और बूढ़ी गंडक ने राहत दी है।  

 

 

Posted By: Kajal Kumari

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