मुजफ्फरपुर, जेएनएन। उत्तर बिहार में सोमवार को नदियों का जलस्तर स्थिर रहा। इसके बावजूद पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी और दरभंगा के निचले इलाकों में परेशानी बनी रही। राहत सामग्र्री नहीं मिलने से बाढ़ पीडि़तों में आक्रोश है। डूबने से पांच लोगों की मौत हो गई। इसमें पूर्वी चंपारण के तीन, मधुबनी और समस्तीपुर के एक-एक लोग हैं। 

पश्चिम चंपारण में नदियों का कटाव तेज हो गया है। ध्वस्त सड़कें ठीक नहीं हो सकी हैं। पीपी तटबंध से सटे धूमनगर के पास अमवा खास बांध पर गंडक का दबाव बढ़ गया है। गंडक में एक लाख एक हजार सात सौ क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया गया है।

पूर्वी चंपारण के बंजरिया प्रखंड क्षेत्र में परेशानी खत्म नहीं हो सकी है। सुगौली प्रखंड की करमवा-रघुनाथपुर पंचायत के वार्ड तीन के बाढ ़पीडि़तों ने मुखिया संपत साह का घेराव कर हंगामा किया। वे राहत सामग्री नहीं मिलने से नाराज थे।

मधुबनी जिले के दर्जनों गांवों के लोग अब भी विस्थापित की ङ्क्षजदगी जी रहे हैं। जल संसाधन मंत्री संजय झा की पहल पर दस सदस्यीय इंटरनेशनल एक्सपर्ट टीम ने झंझारपुर में कमला बांध का निरीक्षण किया। टीम ने टूटे स्थलों और बांध की वर्तमान स्थिति को देखा।

सीतामढ़ी में बागमती और अधवारा समूह की नदियों के जलस्तर में गिरावट जारी रही। हालांकि, कटौझा में बागमती नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर रही। अधवारा समूह की नदियों का जलस्तर भी स्थिर रहा। कुछ इलाके जलजमाव की गिरफ्त में हैं। ध्वस्त सड़कों की मरम्मत का काम तेज हो गया है। बड़ी संख्या में लोग अब भी सड़कों पर समय गुजार रहे हैं। प्रशासनिक स्तर पर राहत कार्य जारी है। दरभंगा जिले के बाढ़ प्रभावित सोलह प्रखंडों में कमला बलान, बागमती और अधवारा समूह की नदियों के जलस्तर में कमी आई है। लेकिन, कुशेश्वरस्थान पूर्वी के रहीपुर, पकोहवा, उद्दा गांव में स्थिति गंभीर है। 

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