मधुबनी, [ कपिलेश्वर साह]। वर्ष 1934 में देश को झकझोर देने वाले भूकंप के बाद मधुबनी पहुंचे डॉ. राजेंद्र प्रसाद का यहां के मसलिन खादी से नाता जुड़ गया। इस अटूट नाता का निर्वहन करते हुए डॉ. राजेंद्र प्रसाद देश के प्रथम राष्ट्रपति बनने के बाद भी इसे नहीं भूले। आजादी से पहले भूकंप की पीडा को कम करने के ख्याल से पहली बार यहां पहुंचे डॉ. राजेंद्र प्रसाद प्रथम राष्ट्रपति के रूप में दोबारा जिले के एमएससी प्लस टू उच्च विद्यालय में वर्ष 1958 में पहुंचे थे। उनके लिए विद्यालय परिसर में बनाया गया मंच आज भी उनकी याद दिला रहा है। दोनों यात्रा के दौरान डॉ. राजेंद्र प्रसाद लोहा में तैयार होने वाले मसलिन खादी के मुरीद हो गए।

डॉ. राजेंद्र प्रसाद का खादी से गहरा लगाव

आजादी की लड़ाई के दौरान महात्मा गांधी के स्वदेशी आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने यहां के खादी को बढ़ावा देने का मन बनाया और स्वयं यहां बुनकरों द्वारा तैयार खादी धोती को अपना लिया। खादी से उनका गहरा लगाव होने से वर्षो तक लोहा के बुनकरों द्वारा तैयार खादी धोती डॉ. राजेंद्र प्रसाद को भेजी जाती रही। प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद द्वारा मधुबनी खादी के प्रयोग से प्रभावित पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने भी मधुबनी खादी के विकास को आगे बढाया।

खादी का बढा था विकास

सर्वोदय नेता व गांधीवादी अगमलाल यादव ने बताया कि डॉ. राजेंद्र प्रसाद को लोहा पहुंचने से लोगों को काफी खुशी होने के साथ खादी का विकास भी आगे बढा था। लोहा उच्च विद्यालय के प्रधानाध्यापक विजय कुमार झा ने बताया कि डॉ. राजेंद्र प्रसाद के लिए बनाए गए मंच पर गणतंत्र दिवस व स्वतंत्रता दिवस के मौके पर झंडोत्तोलन कार्यकम आयोजित किए जाते हैं। 

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