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बाढ़ से फसल को नुकसान पर क्या करें? स्ट्रॉबेरी-आलू और सब्जियां बढ़ाएंगी मुजफ्फरपुर के किसानों की Income

Published: Tue, 13 Oct 2026 01:56 PM (IST)

बाढ़ और अनिश्चित मौसम से प्रभावित मुजफ्फरपुर के किसानों को अब वैकल्पिक खेती अपनानी चाहिए। प्याज, सरसों, सब्जियां, आलू और ...और पढ़ें

बढ़ेगी मुजफ्फरपुर के किसानों की आय (एआई जेनरेटेड तस्वीर)

बढ़ेगी मुजफ्फरपुर के किसानों की आय (एआई जेनरेटेड तस्वीर)

HighLights

  1. बाढ़ से प्रभावित किसान वैकल्पिक खेती से आय बढ़ाएं।

  2. प्याज, सरसों, आलू, स्ट्रॉबेरी जैसी फसलें लाभप्रद विकल्प।

  3. उपज का उचित मूल्य और बाजार नेटवर्क जरूरी।

जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर। मौसम की अनिश्चितता और बाढ़ से परेशान किसानों को अब वैकल्पिक खेती की ओर कदम बढ़ाना चाहिए। खासकर जिन इलाकों में बाढ़ से खरीफ की फसल बर्बाद हुई है, वहां खेतों से पानी निकलते ही प्याज, सरसों-तोरी और सब्जियों की खेती करना किसानों के लिए फायदेमंद हो सकता है। इससे फसल क्षति की भरपाई करने और आमदनी बढ़ाने में मदद मिलेगी। 

ये बातें जागरण विमर्श में कृषि विशेषज्ञ एवं पूर्व जिला उद्यान पदाधिकारी नागेश्वर ठाकुर ने कहीं। उन्होंने कहा कि अनियमित बारिश के कारण खरीफ की फसल प्रभावित हुई है। सितंबर में बारिश के साथ बाढ़ आने से भी फसलों को नुकसान पहुंचा।

परिस्थितियों के अनुसार फसल का करें चयन

धान की रोपनी प्रभावित होने से इस बार करीब छह प्रतिशत कम रोपनी हुई है। इसका असर उत्पादन पर भी पड़ सकता है। ऐसे में किसानों को मौसम की परिस्थितियों के अनुसार फसल का चयन करना चाहिए। जिन खेतों में बाढ़ के कारण फसल बर्बाद हो गई है, वहां पानी निकलने के बाद प्याज, सरसों-तोरी, मूली, साग और अन्य सब्जियों की खेती की जा सकती है। 

धान की भरपाई गेहूं, आलू, हल्दी, ओल, शिमला मिर्च और स्ट्रॉबेरी जैसी फसलें भी विकल्प बन सकती हैं। किसान इन फसलों के माध्यम से बेहतर आमदनी हासिल कर सकते हैं।

उत्पादन बढ़ा, लेकिन किसानों को उचित कीमत की चुनौती 

कृषि विशेषज्ञ नागेश्वर ठाकुर ने कहा कि तीन दशक पहले की तुलना में धान की नई किस्मों के आने से उत्पादन क्षमता में वृद्धि हुई है। हालांकि, किसानों को उपज का उचित मूल्य दिलाना अब भी चुनौती है। सरकार धान खरीद के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) निर्धारित करती है, लेकिन इसका लाभ सभी किसानों तक पूरी तरह नहीं पहुंच पाता। 

धान बेचने के लिए किसानों को कई बार अतिरिक्त अनाज देने की शिकायतें भी सामने आती हैं। सरकारी गोदामों की कमी भी धान खरीद व्यवस्था को प्रभावित करती है।

सब्जियों के साथ आम और लीची के बाग लगाने के लिए सहायता

इस दिशा में निगरानी बढ़ाने और खरीद व्यवस्था को पारदर्शी बनाने की जरूरत है। कहा कि सब्जियों के साथ आम और लीची के बाग लगाने के लिए भी सरकार की ओर से सहायता दी जा रही है। किसानों को इन विकल्पों की ओर बढ़ना चाहिए। 

कहा कि सब्जी उत्पादकों को उपज के अनुरूप बाजार नहीं मिल पाता। कई बार उन्हें उचित कीमत नहीं मिलती है। ऐसे में कृषि विभाग को बाजार नेटवर्क मजबूत करने, किसानों को बाजार से जोड़ने और उनकी उपज की बेहतर बिक्री सुनिश्चित करने की दिशा में पहल करनी चाहिए।

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