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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 19, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Farm Laws Latest News: कानून वापस होने पर मुजफ्फरपुर में मिली जुली प्रतिक्रया

By Ajit KumarEdited By:
Published: Fri, 19 Nov 2021 10:37 AM (GMT+05:30)Updated: Fri, 19 Nov 2021 10:51 AM (GMT+05:30)

Farm Laws Latest News पीएम नरेंद्र मोदी ने तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा की है। आज देश ...और पढ़ें

गुरु नानक देव जयंती के मौके पर पीएम मोदी ने देश को संबोध‍ित क‍िया। एएनआइ
गुरु नानक देव जयंती के मौके पर पीएम मोदी ने देश को संबोध‍ित क‍िया। एएनआइ

मुजफ्फरपुर, आनलाइन डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज देश के नाम अपने संबोधन में किसानों से आंदाेलन वापस लेने का आग्रह किया। उन्होंने सरकार की ओर से तीनों कृषि कानून वापस लिए जाने की घोषणा की है। कहा, आगामी संसद सत्र में इसकी प्रक्रिया शुरू की जाएगी। गुरु नानक जयंती के मौके पर अपने संबोधन में उन्होंने देशवासियों से अपनी बात कुछ किसानों को नहीं समझा पाने के लिए क्षमा याचना की। जैसे ही यह खबर मुजफ्फरपुर के किसानों तक पहुंची उन्होंने अपने-अपने हिसाब से इस पर प्रतिक्रिया दी है। कुछ ने इसे किसान आंदोलन की जीत करार दिया तो कुछ ने किसानों के उत्थान की दिशा में बढ़ाए गए कदम को वापस होने की बात कही है। 

लीची उत्पादक मनोहर सिंह ने कहा कि इन कानूनों को वापस लेने का फैसला सही है। इससे किसानों के काम में सरकार और निजी कंपनियों का हस्तक्षेप नहीं हो सकेगा।  शुभाजीत ने कहा कि किसानों को कानून वापस होने तक आंदोलन पर डटे रहना चाहिए। उन्हें शक है कि वर्तमान सरकार किसानों की वापसी के बाद कोई गेम कर सकती है।

नागा प्रसाद ने प्रधानमंत्री मोदी की इस घोषणा पर निराशा का इजहार किया है। उन्होंने कहा कि किसानों को इस कानून के फायदे समझ में नहीं आए। इसलिए इस तरह की हालत बनी है। हालांकि दर्शन इस फैसल को चुनाव से जोड़कर देख रहे हैं। उनका कहना है कि यह फैसला आने वाले कुछ दिनों के अंदर पांच राज्यों में होनेवाले चुनाव को देखते हुए लिया गया है। किसानों के हित या उनके अनहित से इसका कोई संबंध नहीं है। कमला प्रसाद ने पीए के फैसले पर दुख का इजहार करते हुए कहा कि किसानों के हित की बात का जिस तरह से राजनीतिकरण किया गया और इसका जो स्वरूप हमें पूरे एक वर्ष के किसान आंदोलन के दौरान देखने को मिला, उससे निराशा हुई है। उम्मीद है कि आने वाले दिनों में किसान आंदोलन खुद को राजनीति से दूर ही रखें।