मुजफ्फरपुर, जासं। पानी का कोई विकल्प नहीं है। इसलिए इसे बचाने का संकल्प हम सभी को लेना होगा। पानी बचेगा तभी हमारा जीवन बचेगा। जमीन के नीचे पानी का भंडार सीमित है। इसके बाद भी हम तेजी से उसका दोहन कर रहे हंै। जमीन से पानी निकालकर उसका बड़ा हिस्सा बर्बाद कर रहे हंै। आराम से पानी मिल रहा इसलिए लोगों को इसका महत्व समझ में नहीं आ रहा है, लेकिन वह समय अब दूर नहीं जब हम बूंद-बूंद पानी को तरसेंगे। पानी बचाने के लिए लोगों को जागरूक करना होगा। इसके अनावश्यक दोहन को रोकना होगा। वर्ष जल को संचित करना होगा। प्राकृतिक जलस्रोतों को बचाना होगा। इसके लिए संकल्प के साथ काम करना होगा। शुक्रवार को दैनिक जागरण के सहेज लो हर बूंद अभियान के दौरान बातचीत में प्रबुद्ध लोगों ने ये बाते कहीं।

वार्ड पार्षद पवन राम ने कहा कि शहरवासी अपनी जरूरत से 10 गुना ज्यादा पानी मोटर व सबमर्सिबल पंप से निकालते हैैं। इस प्रकार वे बड़ी मात्रा में संचित भू-जल का दोहन कर रहे हैं, लेकिन जब उनको एक दिन पानी की किल्लत होती है तो परेशान हो उठते हैं। सोचिए, जब संचित जल का भंडार समाप्त हो जाएगा तो क्या होगा? इसलिए पानी की बर्बादी न हो इसके लिए हमें अभी से सजग व जल संरक्षण को संकल्पित होना होगा। समाजसेवी सुनील बंका ने कहा कि जलसंकट से बचना है तो एकमात्र विकल्प बारिश का पानी है। इससे जमीन के संचित भंडार को रीचार्ज किया जा सकता है। इसके अलावा कोई विकल्प नहीं।

समाजसेवी सोनी कुमारी ने कहा कि जल संरक्षण आज की जरूरत है। आज हम पानी बचाएंगे तभी हमारा कल सुरक्षित होगा। हमें पानी को बचाने की मुहिम चलानी होगी। इसके लिए सामाजिक संगठनों, शैक्षणिक संस्थानों, व्यावसायिक संगठनों सभी को शासन-प्रशासन के साथ मिलकर पानी बचाने की मुहिम चलानी होगी। पोखर-तालाबों व कुओं को ङ्क्षजदा करना होगा। जलस्रोतों मेंं कचरा डालने वालों पर कानूनी कार्रवाई करनी होगी। शिक्षक दीपक कुमार ने कहा कि कोरोना का संक्रमण समाप्त होने बाद स्कूली स्तर पर जल संरक्षण की मुहिम चलानी होगी। बच्चों को इससे जोडऩा होगा।  

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