मुजफ्फरपुर : राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र मुशहरी ने अपना 20 वां स्थापना दिवस मनाया। डॉ. बृजेश कुमार पांडेय, सहायक महानिदेशक (बागवानी) नई दिल्ली ने कहा कि किसानों के हित को ध्यान में रखकर शोध होना चाहिए। किसानों की आमदनी दोगुनी करने का लक्ष्य है। इस केंद्र ने एईएस के लीची कनेक्शन की भ्रांति को शोध द्वारा स्पष्ट करे देश के सामने रखा है और लीची की संलिप्तता को नकारा है जिससे लीची किसानों को भारी राहत मिली है वैज्ञानिको के शोध की प्रशंसा करते हुए कहा कि दो दशक के अल्पकाल में केंद्र की उपलब्धिया उत्कृष्ट श्रेणी की है। विषिष्ट अतिथि बिहार पशुविज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. रामेश्वर सिंह ने कहा कि यह सक्रिय शोध संस्थान है जिसने इतने कम समय में ही कई महत्वपूर्ण उपलब्धियों को हासिल किया है। उन्होंने कहा कि पहले लीची कुछ ही राज्यों तक ही सीमित थी, परंतु अब इसका विस्तार लगभग 20 राज्यों में हो चुका है। मुख्य अतिथि और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद में बागवानी विभाग के उपमहानिदेशक, डॉ. आनंद कुमार सिंह ने कम खर्च, टिकाउपन एवं सुरिक्षत तकनीक वाली विधियों को अपनाकर खेती करने की सलाह दी। लीची के बाजार और सरकार की योजनाओं के अुनरूप लीची की खेती करने से किसानों को बेहतर लाभ मिल सकता है। उपमहानिदेशक ने कहा कि अब वह समय आ गया है जब हम विविधीकरण द्वारा खेती को फायदेमंद बना सकते हैं। केंद्र निदेशक डॉक्टर विशाल नाथ ने किए गए शोध पर चर्चा की। डॉ. एसडी पाडेय ने धन्यवाद ज्ञापन तथा डॉ. अलेमवती पोंगनेर ने सभा का संचालन किया। कार्यक्रम में डॉ. मनोज कुमार, डॉ. पंकज कुमार, डॉ. संजय कुमार सिंह, डॉ. विनोद कुमार, डॉ. अभय कुमार, डॉ. आलोक कुमार गुप्ता, डॉ. इविनिंग स्टोन, डॉ. अवतार सिंह, डॉ. आरके पटेल डॉ. एसके पूर्वे आदि जूम के माध्यम से जुड़े।

Posted By: Jagran

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