'एपस्टीन फाइल्स' की बिहार में भी महसूस हो रही धमक, इसके नाम पर लोगों का डाटा लूट रहे साइबर ठग
फर्जी लिंक पर क्लिक करने और जीमेल आईडी से लॉगिन करने पर यूजर्स की निजी व वित्तीय जानकारी चोरी हो ...और पढ़ें

Phishing Data Theft: इंटरनेट पर किसी को कुछ साबित करने की जरूरत नहीं है और हर वायरल गतिविधि सुरक्षित नहीं होती। यह एआई की तस्वीर है।
HighLights
'एपस्टीन फाइल्स' के नाम पर हो रही फिशिंग और डेटा चोरी।
फर्जी लिंक पर जीमेल लॉगिन से बचें, यूआरएल जांचें।
बच्चों के लिए ऑनलाइन चुनौतियां भी गंभीर खतरा बनीं।
जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर। Cyber Fraud Bihar: दुनियाभर में चर्चा में रहे ‘एपस्टीन फाइल्स’ अब साइबर ठगों का नया हथियार बन गए हैं। इस नाम की आड़ में बिहार समेत देश के कई हिस्सों में फिशिंग स्कैम और डाटा चोरी की घटनाएं सामने आ रही हैं।
साइबर सुरक्षा एजेंसियों ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि इंटरनेट पर वायरल हो रहे ‘एपस्टीन फाइल्स’ से जुड़े फर्जी लिंक यूजर्स की निजी और वित्तीय जानकारी के लिए बड़ा खतरा हैं।
साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, ठग चर्चित और विवादित विषयों का सहारा लेकर फर्जी वेबसाइट और लिंक तैयार कर रहे हैं। जैसे ही कोई यूजर ‘एपस्टीन फाइल्स’ की जानकारी पाने के लिए इन लिंक पर क्लिक करता है, उसे कंटेंट एक्सेस के बहाने जीमेल आईडी से लॉगिन करने को कहा जाता है।
जिज्ञासा में लोग अपनी आईडी और पासवर्ड दर्ज कर देते हैं। इसके तुरंत बाद हैकर्स ईमेल, कॉन्टैक्ट्स और बैंकिंग से जुड़ी संवेदनशील जानकारियों तक पहुंच बना लेते हैं।
बिना URL जांचे लॉगिन करना सीधा खतरा
साइबर एक्सपर्ट्स का कहना है कि बिना यूआरएल वेरीफाई किए किसी भी अनजान साइट पर लॉगिन करना वित्तीय साइबर फ्रॉड को सीधा निमंत्रण देता है। ट्रेंडिंग टॉपिक के नाम पर आने वाले लिंक अक्सर सबसे ज्यादा खतरनाक साबित होते हैं।
ऑनलाइन चैलेंजेस और बच्चों की सुरक्षा पर संकट
इसी बीच इंटरनेट मीडिया पर बढ़ते ऑनलाइन चैलेंजेस बच्चों के लिए भी गंभीर खतरा बनते जा रहे हैं। दोस्ती के दबाव, सोशल एक्सेप्टेंस और FOMO (छूट जाने का डर) के कारण बच्चे खतरनाक चुनौतियों को स्वीकार कर लेते हैं।
लाइक्स और कमेंट्स को सफलता का पैमाना मानने से शारीरिक चोट और मानसिक नुकसान का जोखिम बढ़ जाता है। कई मामलों में वायरल होने की चाह में बच्चे अपनी सुरक्षा की सीमाएं लांघ देते हैं।
मनोवैज्ञानिकों और साइबर विशेषज्ञों ने माता-पिता को सलाह दी है कि बच्चों के व्यवहार में अचानक आए बदलाव जैसे जरूरत से ज्यादा गोपनीयता, मोबाइल से चिपके रहना या अकेलापन पर नजर रखें। बच्चों को यह समझाना जरूरी है कि इंटरनेट पर किसी को कुछ साबित करने की जरूरत नहीं है और हर वायरल गतिविधि सुरक्षित नहीं होती।
क्या है ‘एपस्टीन फाइल्स’?
‘एपस्टीन फाइल्स’ दरअसल उन अदालती दस्तावेजों का विशाल संग्रह है, जो अमेरिकी अरबपति और कुख्यात सेक्स अपराधी जेफरी एपस्टीन से जुड़े हैं। एपस्टीन पर नाबालिग लड़कियों की तस्करी और यौन शोषण के गंभीर आरोप थे।
वर्जीनिया गिफ्रे का मुकदमा
ये दस्तावेज मुख्य रूप से वर्ष 2015 के एक मानहानि मुकदमे से सामने आए, जो एपस्टीन की पीड़िता वर्जीनिया गिफ्रे ने उसकी करीबी सहयोगी घिसलेन मैक्सवेल के खिलाफ दायर किया था। इसी केस के दौरान कई गवाहियों और दस्तावेजों को सार्वजनिक किया गया।
दस्तावेजों में क्या है?
इन फाइलों में गवाहों के बयान, ईमेल, उड़ानों का ब्योरा और उन लोगों के नाम शामिल हैं, जिनका किसी न किसी रूप में एपस्टीन से संपर्क रहा या जो उसके निजी द्वीप और विमानों से जुड़े बताए गए।
इसकी इतनी चर्चा क्यों है?
‘एपस्टीन फाइल्स’ को लेकर चर्चा इसलिए तेज है क्योंकि इनमें कई हाई-प्रोफाइल और प्रभावशाली हस्तियों के नाम सामने आए हैं।
इनमें पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन, डोनाल्ड ट्रंप, ब्रिटेन के शाही परिवार के सदस्य प्रिंस एंड्रयू और अरबपति बिल गेट्स जैसे नाम शामिल बताए गए हैं।
हालांकि, विशेषज्ञ स्पष्ट करते हैं कि फाइलों में नाम होना किसी के दोषी होने का प्रमाण नहीं है। कई लोग केवल सामाजिक या कारोबारी संपर्क में थे, लेकिन जनता और मीडिया यह जानना चाहते हैं कि एपस्टीन की गतिविधियों की जानकारी किसे थी।
न्याय और राजनीति का पहलू
2019 में जेल में एपस्टीन की संदिग्ध मौत के बाद पीड़ितों और आम लोगों के बीच यह मांग तेज हुई कि उसके अपराधों में मदद करने वालों को सजा मिले। वहीं, कई देशों में इन फाइलों का इस्तेमाल राजनीतिक बहसों और चुनावी आरोप-प्रत्यारोप में भी किया जा रहा है।
- ऐसे रखें खुद और बच्चों को सुरक्षित
- किसी भी वेबसाइट पर जीमेल आईडी या ओटीपी कैजुअली दर्ज न करें।
- टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन जरूर चालू रखें।
- ट्रेंडिंग और सनसनीखेज लिंक पर क्लिक करने से पहले उनकी प्रामाणिकता जांचें।
ठगी का शिकार होने पर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या सरकारी पोर्टल cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं।
साइबर सुरक्षा एजेंसियों ने साफ किया है कि जिज्ञासा के नाम पर ठगों के जाल में फंसना आसान हो गया है। सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है चाहे मामला ‘एपस्टीन फाइल्स’ का हो या किसी अन्य वायरल ट्रेंड का।
