मुजफ्फरपुर, जेएनएन। बीआरए बिहार विश्वविद्यालय के पीजी हिंदी विभाग में संचालित पीजी डिप्लोमा इन ङ्क्षहदी इन मास कम्युनिकेशन कोर्स में नामांकन शुरू हो गया है। कोर्स के डायरेक्टर डॉ.सतीश कुमार राय ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए बताया कि ङ्क्षहदी विभाग में 40 सीटों पर पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा की पढ़ाई होती है। सत्र-2020-21 के लिए इसमें नामांकन शुरू हो गया है। किसी भी संकाय या विषय से स्नातक पास करने वाले विद्यार्थी इस कोर्स में नामांकन ले सकते हैं।

यह है कोर्स फी

पीजी डिप्लोमा इन मास कम्युनिकेशन कोर्स के लिए 12000 रुपये फी है। विद्यार्थी इसे दो किस्त में जमा कर सकते हैं। डॉ.सतीश कुमार राय ने बताया कि इस कोर्स में नियमित कक्षा का संचालन होता है। साथ ही विद्यार्थियों को कार्यशाला के माध्यम से रचनात्मकता से अवगत कराया जाता है।

हिंदी विभाग से निकलेंगी तीन पत्रिकाएं

पीजी हिंदी विभाग से तीन पत्रिकाएं निकाली जाएंगी। इसको लेकर कार्य शुरू हो गया है। डॉ.सतीश कुमार ने बताया कि विभाग के 70 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में एक स्मारिका निकाली जाएगी। इसमें विभाग का पूरा इतिहास समाहित होगा। वहींं दो पत्रिकाएं भी निकाली जाएंगी। विभाग की ओर से शोध मनीषा अद्र्धवार्षिक पत्रिका निकाली जाएगी। डॉ.कल्याण झा इसके कार्यकारी संपादक होंगे। इसमें ङ्क्षहदी विभाग के विद्यार्थियों और शिक्षकों की ओर से शोध सामग्री का प्रकाशन किया जाएगा। वहीं नई पहल नामक पत्रिका भी विभाग की ओर से शुरू की जा रही है। डॉ.राकेश रंजन इसके कार्यकारी संपादक होंगे। इसमें विद्यार्थियों, शिक्षकों की साहित्यक रचनाओं का प्रकाशन होगा। वहीं दोनों पत्रिका के संपादक डॉ.सतीश कुमार राय होंगे।

विद्यार्थियों को रियायती दर पर मिलेंगी पुस्तकें

हिंदी विभाग में अध्ययनरत विद्यार्थियों को अप्रैल से रियायती दर पर पुस्तकें उपलब्ध कराई जाएंगी। विभागाध्यक्ष ने बताया कि प्रकाशकों से बात की गई है। सीधे प्रकाशकों से पुस्तकें विभाग में मंगवाई जाएंगी। साथ ही मार्केट रेट से कम में इन्हें विद्यार्थियों को उपलब्ध कराया जाएगा। अप्रैल से ही विभाग में एक वाचनालय भी शुरू किया जाएगा।

प्रत्येक गुरुवार को साहित्यक आयोजन

हिंदी विभाग में प्रत्येक गुरुवार को साहित्यक आयोजन होगा। इसमें एकल काव्य पाठ, संगोष्ठी, परिचर्चा और अन्य कार्यक्रम भी किए जा रहे हैं। प्रेसवार्ता के दौरान डॉ.राकेश रंजन, डॉ.कल्याण कुमार, डॉ.वीरेंद्र नाथ मिश्र, डॉ.रेवती रमण आदि थे।  

Posted By: Ajit Kumar

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