मुजफ्फरपुर (जेएनएन)। कभी नारी शिक्षा में काफी पीछे। अधिकतर महिलाएं अंगूठा छाप। रोजगार का कोई साधन नहीं, इसलिए गरीबी की भी मार। ऐसे में महज सातवीं पास बिनवलिया निवासी चानमति देवी ने तकरीबन 26 साल पहले नारी शिक्षा को बढ़ावा देने का अभियान शुरू किया। महिलाओं को शिक्षा का महत्व बताने के साथ उन्हें निश्शुल्क पढ़ाने लगीं। लड़कियों को स्कूल जाने के लिए प्रेरित किया। इसके बाद हस्तकरघा से जोड़ रोजगार का साधन उपलब्ध कराया। आज सैकड़ों महिलाएं शिक्षित होने के साथ रोजगार से जुड़ चुकी हैं। बालिका शिक्षा का स्तर बढ़ा है।

पति ने बढ़ाया हौसला

बात वर्ष 1992 की है। थरुहट में नारी शिक्षा का निम्न स्तर और गरीबी देख चानमति का दिल कुछ अलग करने को प्रेरित हुआ। उन्होंने हरनाटाड़ उच्च विद्यालय में प्रधानाध्यापक पति दीपनारायण प्रसाद से दिल की बात कही। उन्होंने हौसला बढ़ाया तो वे नारी शिक्षा की राह पर चल पड़ीं। गांव-गांव जाकर महिलाओं को शिक्षा का महत्व बताया। उन्हें निश्शुल्क पढ़ाने लगीं। पति भी मदद करने लगे। जागरूकता बढ़ी तो थरुहट महिला विकास संस्था की स्थापना की। प्राइमरी के बाद स्कूल नहीं होने के चलते लड़कियां पढ़ नहीं पाती थीं। इसकी कमी पूरी करने के लिए 1991 में संस्था के बैनर तले युगुल साह जनजाति बालिका उच्च विद्यालय की स्थापना की गई। इससे क्षेत्र की किशोरियों को जोड़ने की जिम्मेदारी महिलाओं को दी गई। इसका सकारात्मक परिणाम सामने आया। आज थरुहट में बालिका शिक्षा का स्तर बढ़ा है।

महिलाओं के लिए रोजगारपरक पाठशाला

ग्रामीण महिलाएं मउनी, डलिया व सूप आदि बनाने में निपुण थीं। इसलिए उन्हें रोजगार से जोड़ने के लिए चानमति ने इसे हस्तकरघा उद्योग के रूप में बढ़ावा देना शुरू किया। धीरे-धीरे यह सफल होने लगा। संस्था के बैनर तले महिलाओं को चरखा चलाना, बुनाई-कढ़ाई, सिलाई सहित अन्य में निपुण किया गया। इससे सैकड़ों महिलाओं को रोजगार मिला। घर का काम निपटाने के बाद महिलाएं रोजगारपरक पाठशाला में पहुंचती हैं। वहां निश्शुल्क शिक्षा दी जाती है। इसका खर्च सामाजिक सहयोग से चलता है। 100 से अधिक महिलाएं साक्षर बनने के साथ हस्तकरघा व बकरी पालन सहित अन्य रोजगार से जुड़ चुकी हैं। 50 युवतियों व महिलाएं एमए कर चुकी हैं। दर्जनों लड़कियां उच्च शिक्षा ग्रहण कर रही हैं।

मिश्रौली निवासी जानकी देवी व रेणु देवी कहती हैं कि वे पढ़कर आज अपने पैरों पर खड़ी हैं। बैरिया खुर्द निवासी विनीता कुमारी व रिया का कहना है कि चानमति ने उच्च शिक्षा के लिए प्रेरित किया। एमए के बाद अब अन्य को शिक्षा के लिए जागरूक कर रही हैं।

बेटियां पढ़-लिखकर बनें स्वावलंबी

चानमति का सपना है कि घर-घर बेटियां पढ़-लिखकर स्वावलंबी बनें। ताकि खुशहाली आए। वे कहती हैं बेटियां पढ़ेंगी तभी समाज में नया सवेरा आएगा। बगहा दो के बीईओ सुभाष बैठा कहते हैं कि चानमति वास्तव में नारी सशक्तीकरण की मिसाल हैं। उनके काम से लोगों को प्रेरणा लेनी चाहिए।

Posted By: Jagran