मुजफ्फरपुर, जेएनएन। कोरोना संकट को लेकर जारी लॉकडाउन से उत्तर बिहार के उद्योग, कारोबार बड़े पैमाने पर प्रभावित हो रहे हैं। बीते 24 दिनों में जिले में 600 अरब के व्यवसाय सहित पूरे उत्तर बिहार में 1500 अरब का कारोबार प्रभावित हुआ है। अब लॉकडाउन टू में कारोबार प्रभावित होने का आंकड़ा बढ़कर दोगुना होने के आसार हैं। इस संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता है।

नुकसान भरपाई की चुनौती

लॉकडाउन-2 की मियाद तीन मई तक रखी गई है। जाहिर है कि यहां के गारमेंट उद्योग, भवन निर्माण, इलेक्ट्रिक, इलेक्ट्रॉनिक्स, बेकरी, पानी, सराफा मार्केट के समक्ष इसकी भरपाई की चुनौती है। टेक्सटाइल कारोबारी सह नॉर्थ बिहार चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के मीडिया प्रभारी सज्जन शर्मा ने बताया कि लॉकडाउन ने मुजफ्फरपुर समेत पूरे उत्तर बिहार में उद्योग और व्यवसाय की कमर तोड़ दी है। इसके चलते नुकसान का दायरा लगातार बढ़ रहा है। इसके बावजूद हम इस वैश्विक महामारी के बुरे दौर में सरकार के साथ हैं और आम जनता से अपील करते हैं कि लॉकडाउन का पालन करें।

बाजार में पहले से मंदी

किराना कारोबारी संजय गुप्ता ने कहा कि बाजार अनिश्चतता की गिरफ्त में है। होली बाद से ही बाजार में मंदी है। तीन मई के बाद स्थिति सामान्य होती भी है तो बाजार को संभलने में लंबा वक्त लगेगा। अहनीटेक प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक नीतीश कुमार भारद्वाज ने बताया कि जिले समेत उत्तर बिहार के तमाम छोटे-बड़े उद्योग बंद पड़े हैं। इन्हें फिर से शुरू कराने की चुनौती होगी। बताया कि जिले में 130 छोटे-बड़े उद्योग हैं, जिन्हें लॉकडाउन-1 में अरबों का नुकसान उठाना पड़ा है। सराफा कारोबारी पंकज कुमार ने बताया कि यह कठिन दौर है। इसके पार होने के बाद नुकसान का आकलन किया जाएगा। वैसे सराफा का कारोबार बर्बाद हो गया है।

25 दिनों में व्यवसाय पर कितना असर :

व्यवसाय : मुजफ्फरपुर : उत्तर बिहार

आटोमोबाइल : 200 करोड़ : 800 करोड़

इलेक्ट्रॉनिक्स : 200 करोड़ : 600 करोड़

टेक्सटाइल : 300 अरब : 600 अरब

इलेक्ट्रिक : 50 करोड़ : 300 करोड़

भवन निर्माण सामग्री : 500 करोड़ : 1500 करोड़

पेट्रोलियम : 400 करोड़ : 1500 करोड़

बोतलबंद पानी : 2 करोड़ : 6 करोड़ सराफा : 100 करोड़ : 400 करोड़

ट्रांसपोर्ट : 215 करोड़ : 450 करोड़

लघु एवं सूक्ष्म उद्योग : 2500 करोड़ : 8,000 करोड़

खाद, बीज कीटनाशक : 90 करोड़ : 400 करोड़

शृंगार-प्रसाधन : 800 करोड़ : 2500 करोड़

किराना व गल्ला : 1000 करोड़ : 3000 करोड़

इसके अलावा पशु चारा, पशु दवा, चिकन, मटन, मछली, बेकरी, मसाला, पापड़, एफएमसीजी उद्योग, पार्लर, होटल, रेस्तरां, शिक्षण सामग्री, फल व सब्जी का कारोबार 500 करोड़ से अधिक का प्रभावित हुआ है।

 

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