दरभंगा, जेएनएन। मुंबई आइआइटी के पूर्व साधनसेवी व स्थानीय संस्था शेखर साइंस सॉल्यूशन के निदेशक डॉ. पांशु प्रतीक अब अमेरिकी छात्रों व शिक्षकों को मिथिला के प्रसिद्ध तिलकोर के औषधीय गुणों से परिचित कराएंगे। अमेरिका के टैक्सास स्थित संस्था यूनाइटेड के ट्रैफिक ग्रुप के तीसरे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में बतौर वक्ता उन्हें आमंत्रित किया गया है। दो से चार नवंबर तक आयोजित होने वाले सम्मेलन में डॉ. पांशु प्रतीक को उनके शोध के विषय के कारण बुलाया गया है। तिलकोर पर डॉ. पांशु प्रतीक के शोध को देश व विदेश में प्रसिद्धि मिली थी और कई देशों से तिलकोर के औषधीय गुणों को लेकर उन्हें आमंत्रित भी किया गया था।

मिथिला की परंपरागत जड़ी बूटियों को मान्यता

ट्रेडिशनल मेडिसिन फाइटोकेमेस्ट्री एंड मेडिसिनल प्लांट विषय पर आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में डॉ. पांशु प्रतीक का आमंत्रित किया जाना न केवल उनका व्यक्तिगत सम्मान है। बल्कि, संपूर्ण मिथिला के युवा वैज्ञानिक विशेष रूप से मिथिला के परंपरागत जड़ी बूटियों की मान्यता का प्रतीक है। ज्ञात हो कि डॉ. पांशु प्रतीक ने अपने शोध में तिलकोर के औषधीय गुण से संसार को परिचित कराया था। उनके इसी खोज की वजह से अमेरिकी संस्था ने अपने वार्षिक सम्मेलन के लिए उन्हें आमंत्रित किया है।

डायबिटीज पर पूर्ण नियंत्रण

यह संस्था तीन वर्षों से लगातार ट्रेडिशनल मेडिसिन पर शोध करने वाले विश्व के विभिन्न भागों से नामचीन विद्वानों को अपने सम्मेलन में आमंत्रित करती रही है। मिथिला में स्वादिष्ट तरवा के लिए प्रसिद्ध तिलकोर को एक औषधि के रूप में अंतरराष्ट्रीय फलक पर रखने के कारण डॉ. पांशु प्रतीक को भी एक अलग पहचान मिली है। डॉ. पांशु प्रतीक ने बताया कि इसके उपयोग से डायबिटीज पर पूर्ण नियंत्रण पाया जा सकता है। इसके अलावा योन रोग व चर्म रोग में भी तिलकोर रामबाण का काम करता है।  

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