मुजफ्फरपुर। सनातन धर्म परंपरा में हरितालिका तीज व्रत अखंड सौभाग्य का रक्षक माना जाता है। यह पर्व बुधवार को परंपरागत रूप से आस्था व श्रद्धा के साथ मनाया जाएगा। पति-पत्नी दोनों एक-दूसरे के सौभाग्य हैं। इसलिए यह व्रत महिलाएं ही करती हैं। इस पर्व को लेकर पूरे बाजार में खरीदारी को लेकर महिलाओं की भीड़ उमड़ पड़ी। सभी आवश्यक सामान की खरीदारी की। पर्व को लेकर फलों के बाजार में तेजी रही।

इस दिन व्रत रहने वाली महिला पूरे दिन निराहार व निराजल व्रत रह भगवान शिव व मां पार्वती की आराधना करती है। महिलाएं की सौभाग्य सामग्रियों की खरीदारी देर रात तक जारी थी। शहर के अनेक मोहल्लों की सड़कों पर तीज व्रत से संबंधित सामानों की अस्थायी दुकानें सजी है।

व्रत की विशेषता

इस व्रत की विशेषता यह है कि इसमें पार्वती के त्याग, संयम, धैर्य व एकनिष्ठ पतिव्रत धर्म पर प्रकाश डाला गया है। दूसरे जन्म में पार्वती ने भगवान शंकर को प्राप्त करने के लिए कठिन तपस्या की थी। व्रती इस महात्म्य कथा को अवश्य सुनते हैं। पार्वती ने शुक्ल तृतीया हस्त नक्षत्र में आराधना की थी, इसलिए इस तिथि को यह व्रत किया जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार हरितालिका तीज का व्रत सुहागिन महिलाएं पति और परिवार का सौभाग्य प्राप्त करने के लिए करती हैं। कहा जाता है इस व्रत को पूरी श्रद्धा से करने वाली महिलाओं की मनोकामना पूरी होती है। विधि विधान से करें व्रत

- पौराणिक कथाओं की मान्यता के अनुसार व्रत करने वाली महिलाओं को निर्जला रहकर व्रत करना चाहिए। साथ ही दिन रात में सोना नहीं चाहिए। तीज की रात को सभी महिलाओं को मिलकर भजन गायन करना चाहिए। कहा जाता है कि तीज की रात को यदि व्रत करने वाली महिला सोती है तो मनवांछित फल नहीं मिलता है। व्रत करने वाली महिलाओं को शांत रहना चाहिए, उन्हें किसी प्रकार का क्रोध नहीं करना चाहिए।

Posted By: Jagran