मुजफ्फरपुर, जेएनएन। उत्तर बिहार के विभिन्न जिलों में श्रद्धालु मंगलवार की सुबह से ही विभिन्न जलाशयों में स्नान कर रहे। इसके बाद वे पूजा-अर्चना कर दान कर रहे।

कार्तिक मास की पूर्णिमा को कार्तिक पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है। शैव और वैष्णव दोनों ही संप्रदायों में इसका बराबर महत्व है। इस दिन जहां भगवान शिव जी ने त्रिपुरासुर नामक राक्षस का वध किया था तो भगवान विष्णु ने भी इसी दिन मत्स्य अवतार लिया था। यही नहीं, गुरुनानक देव का जन्म भी इसी तिथि को हुआ था। इसलिए कार्तिक पूर्णिमा को प्रकाश और गुरु पर्व के रूप में भी मनाया जाता है।

गंगा स्नान व दीप दान का खास महत्व

कर्मकांड व ज्योतिष मर्मज्ञ पंडित कमलापति त्रिपाठी 'प्रमोद' बताते हैं कि कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा स्नान व दीप दान का खास महत्व है। शास्त्रों में बताया गया है कि इस दिन गंगा या किसी पवित्र सरोवर के तट अथवा तुलसी के समीप दीप जलाने से मां महालक्ष्मी प्रसन्न होती हैं। यह भी कहा गया है कि कार्तिक पूर्णिमा को भगवान विष्णु को तुलसी माला और गुलाब का फूल चढ़ाने से सारी मुराद पूरी होती है। साथ ही महादेव को धतूरे का फल और भांग चढ़ाने से काल सर्प दोष से मुक्ति मिलती है। इस दिन देव दीपावली मनाए जाने का भी विधान है।

कल्पवास भी स्नान के साथ संपन्न

रामदयालु स्थित मां मनोकामना देवी मंदिर के पुजारी पंडित रमेश मिश्र बताते हैं कि कार्तिक मास का कल्पवास भी कार्तिक पूर्णिमा के दिन संपन्न होता है। मालूम हो कि कल्पवास के दौरान श्रद्धालु भक्त पूरे कार्तिक माह प्रयाग, काशी अथवा सिमरिया तट पर रहते हैं। प्रात:काल गंगा नदी में स्नान और ध्यान करते हैं।

इस दिन क्या करें दान

अरवा चावल, जौ, तिल, मौसमी फल, लौकी में छिपाकर सिक्का दान 

 

Posted By: Ajit Kumar

अब खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस, डाउनलोड करें जागरण एप