मुजफ्फरपुर, [अमरेंद्र तिवारी]। सदर अस्पताल में उपलब्ध संसाधनों और चिकित्सकों की क्षमता के अनुरूप मरीजों का इलाज नहीं हो रहा है। विलंब से आने या कार्यस्थल पर अनुपस्थित रहने के कारण चिकित्सक मानक संख्या से आधे से कम मरीजों को ही देख रहे हैं। ऐसे में मरीज या तो निजी अस्पताल की ओर रुख करते हैं या फिर श्रीकृष्ण मेडिकल कालेज एवं अस्पताल पहुंचते हैं। जो कहीं नहीं जा पाते, वे रामभरोसे पड़े रहते हैं। आधे-अधूरे तरीके से उनका इलाज किया जाता है। कई बार लापरवाही को लेकर हो-हंगामा भी हो चुका है। सदर अस्पताल में 25 चिकित्सक कार्यरत हैं। यहां के मैन्युअल के अनुसार एक चिकित्सक को प्रतिदिन 40 मरीजों को देखना है। अर्थात एक माह में 30 हजार मरीजों की जांच कर इलाज करना है, लेकिन बीते छह माह में यह आंकड़ा 15 हजार से ऊपर नहीं गया। 

नियमित निरीक्षण हो रहा

बोचहां के रामरोशन पंडित ने कहा कि प्रसव के लिए बेटी को लेकर आए थे। सोमवार को शाम की पाली में चिकित्सक नहीं थे। रेफर कर दिया गया, निजी अस्पताल में ले जाना पड़ा। यहां निशुल्क दवा व इलाज के बावजूद कार्य संस्कृति की वजह से कम मरीज पहुंच रहे हैं। सिविल सर्जन डा. यूसी शर्मा ने कहा कि चिकित्सक व कर्मियों की कार्यशैली में बदलाव को लेकर नियमित निरीक्षण हो रहा है। कम से कम 40 मरीज एक चिकित्सक को देखना चाहिए। इसे लेकर रोस्टर जारी करने का निर्देश दिया गया है। हर चिकित्सक का दायित्व है कि वह मरीज का इलाज करे और जरूरत पडऩे पर भर्ती करे।

  • महीनावार मरीजों का इलाज

  • माह-मरीजों की संख्या
  • दिसंबर 2021-10815
  • जनवरी 2022-9604
  • फरवरी-11967
  • मार्च-13604
  • अप्रैल-13190
  • मई-14260

आंकड़ों की जुबानी

  • चिकित्सकों की संख्या -25
  • चिकित्सकों के अलावा अन्य कर्मी -93
  • चिकित्सकों को वेतन मद में हर माह भुगतान- 3080370
  • कर्मियों के भुगतान पर हर माह खर्च-5932454

न्यूमेरिक्स

  • -100 बेड हैं सदर अस्पताल में
  • -25-30 मरीज औसतन भर्ती होते हैं प्रतिदिन
  • -7-8 प्रसव होता है प्रतिदिन, जबकि यहां छह महिला चिकित्सक कार्यरत 

Edited By: Ajit Kumar