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पश्चिम चंपारण, [शशि कुमार मिश्र]। तीन वर्ष पहले मछली पालकों को दूसरे जिले के मत्स्यबीज पर निर्भर रहना पड़ता था। आज स्थिति पूरी तरह से बदल गई है। मत्स्यबीज का उत्पादन बढऩे से दूसरे जिलों तक सप्लाई की जा रही। यह सब संभव हुआ है मत्स्य विभाग के प्रयास से। इससे दर्जनों लोगों को रोजगार मिलने के साथ मछली पालकों को सस्ते में मत्स्यबीज उपलब्ध हो रहा। इसका असर मछली उत्पादन पर भी पड़ा है।

जलीय क्षेत्र से भरपूर यह जिला मत्स्य उत्पादन के क्षेत्र में अपार संभावनाएं लिए है।

    यहां कुल जलीय क्षेत्र चार हजार एकड़ है। यही कारण है कि यहां मछली पालकों की संख्या तकरीबन 15 हजार है। तीन वर्ष पूर्व जिले में सालाना 199 लाख मत्स्यबीज का उत्पादन होता था, जबकि मांग 215 लाख तक थी। इसके चलते पालकों को मत्स्यबीज बाहर से मंगाना पड़ता था। यह महंगा पड़ता था। इसे देखते हुए मत्स्य विभाग की मदद से सिकटा, नरकटियागंज, चनपटिया और मैनाटांड़ में पांच हैचरियों का निर्माण हुआ। इसके पहले नौ हैचरियों से ही मत्स्यबीज का प्रजनन होता था। यह संख्या 14 होने से प्रजनन 199 लाख से बढ़कर 225 लाख हो गया।

पानी मीठा होने से गुणवत्ता अच्छी

पिपरा में हैचरी चलाने वाले नीरज कुमार कहते हैं कि जिले में प्रजनित मत्स्यबीज की गुणवत्ता काफी अच्छी है। प्रजनक मछली तीन किलोग्राम एवं इससे ऊपर की होती है। नरकटियागंज में हैचरी चलाने वाले मो. सलाउद्दीन का कहना है कि यहां का पानी मीठा होने से मत्स्यबीज में जीवित रहने की क्षमता अधिक होती है। यही कारण है कि इसकी मांग काफी अधिक है। हर साल 26 लाख मत्स्यबीज बाहर भेजा जा रहा।

  बगहा में हैचरी चला रहे राजेश कुमार कहते हैं कि मत्स्यबीज का उत्पादन ज्यादा और गुणवत्ता अच्छी होने के कारण इसकी मांग पूर्वी चंपारण के अलावा पूर्वी उत्तर प्रदेश और पड़ोसी देश नेपाल तक है। हर साल पांच लाख मत्स्यबीज नेपाल भेजा जा रहा। तीन वर्षों में मत्स्यबीज की सप्लाई में यह बड़ा जिला बन गया है। पश्चिमी चंपारण के जिला मत्स्यपालन पदाधिकारी मनीष कुमार श्रीवास्तव मत्स्य उत्पादन में इजाफा लाने में सबसे अहम भूमिका जीरा या मत्स्यबीज (स्पान) की है।

   मत्स्यबीज उत्पादन में जिले ने बेहतर उपलब्धि हासिल की है। मछली उत्पादन में भी यह जिला आत्मनिर्भर होने की ओर है। यहां सालाना 29 हजार मीट्रिक टन मछली का उत्पादन हो रहा। मत्स्यपालकों को विभाग जरूरी सुविधा मुहैया कराता है।

 

Posted By: Ajit Kumar

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