मुजफ्फरपुर : उत्तर बिहार वाणिज्य एवं उद्योग परिषद ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से आगामी बजट में आयकर छूट की सीमा पांच रुपये करने एवं नकद भुगतान की सीमा 10 हजार रुपये से बढ़ाकर 20 हजार रुपये करने की मांग की है। साथ ही जीएसटी रिटर्न की वर्तमान व्यवस्था में किसी प्रकार का बदलाव नहीं करने की मांग की है। शनिवार को नार्थ बिहार चैंबर ऑफ कामर्स एवं इंडस्ट्री के आयकर उपसमिति की बैठक चेयरमैन रमेश चंद्र टिकमानी की अध्यक्षता में हुई। बैठक में आगामी केंद्रीय बजट को ध्यान में रखकर प्रस्ताव तैयार किया गया जिसे केंद्रीय वित्त मंत्री को सौंपा जाएगा। उत्तर बिहार के व्यापारियों से रूबरू होने के लिए केंद्रीय वित्त मंत्री को मुजफ्फरपुर आने के लिए आमंत्रित करने का फैसला लिया गया। बैठक में व्यवसायियों के साथ एक दर्जन से अधिक चार्टड अकाउंटेंटस ने हिस्सा लिया। प्रस्ताव तैयार करने वालों में सज्जन गिंदोरिया, आशीष मसकरा, नितिन बंसल, राहुल केजरीवाल, अंकित हिसारिया, आदित्य तुलस्यान, राहुल केजरीवाल, सज्जन कुमार शर्मा शामिल रहे।

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प्रस्ताव के माध्यम से वित्त मंत्री से की गई मांग :

- आयकर छूट की सीमा बढ़ाकर पांच लाख रुपये किया जाए।

- 5 से 10 लाख रुपये तक की आय पर 10 फीसद और 10 लाख रुपये से उपर की आय पर 25 फीसद कर लगाया जाए।

- पार्टनरशिप फार्म पर आयकर 30 से घटाकर 25 फीसद किया जाए।

- आयकर अधिनियम 80 सी के तहत छूट की सीमा डेढ़ से बढ़ाकर दो लाख रुपये किया जाए।

- नेशनल पेंशन स्कीम के तहत छूट की सीमा 50 हजार से बढ़ाकर एल लाख रुपये हो।

- आयकर अधिनियम 80 डी के तहत हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम पर छूट की सीमा 25 से बढ़ाकर 50 हजार रुपये किया जाए। वरीय नागरिकों के लिए यह सीमा 50 से बढ़ाकर 75 हजार रुपये किया जाए।

- पूर्व की भांति चार की जगह तीन किश्तों में एडवांस टैक्स जमा करने की व्यवस्था लागू की जाए।

- नकद भुगतान की सीमा पूर्व भी भांति 10 हजार रुपये से बढ़ाकर 20 हजार रुपये किए जाए।

- आयकर अधिनियम की धारा 115 बीबीई के तहत अघोषित संपत्ति पर लगाए जाने वाले टैक्स रेट को 60 से 30 फीसद किया जाए।

- समय पर रिटर्न जमा नहीं करने पर विक्रेता की गलती की जवाबदेही से क्रेता को मुक्त किया जाए। गलती के लिए विक्रेता से जुर्माना की वसूली हो और क्रेता को इनपुट टैक्स क्रेडिट का भुगतान किया जाए।

- समय पर टैक्स की पूरी रकम नहीं जमा करने पर कुल बकाए की जगह शेष बकाया राशि पर ब्याज की वसूली जाए। इसे पहली अप्रैल 2019 की जगह पहली जुलाई 2017 से लागू किया जाए।

- जीएसटी रिटर्न की वर्तमान व्यवस्था में किसी प्रकार का बदलाव नहीं किया जाए। हर साल व्यवस्था बदलने से परेशानी होती है। इनसेट :

प्लास्टिक मनी की अनिवार्यता की समय सीमा बढ़े आयकर अधिनियम की धारा 269 एसयू के तहत 50 करोड़ से अधिक का टर्नओवर करने वाले व्यापारियों के लिए प्लास्टिक मनी, यथा डेबिट कार्ड, रुपे कार्ड एवं यूपीआइ के उपयोग की अनिवार्यता की समय सीमा 31 जनवरी तक रखी गई है। तय समय सीमा के बाद व्यवस्था लागू नहीं करने वालों पर पांच हजार रुपये प्रतिदिन जुर्माना का प्रावधान किया गया है। चैंबर ने इस समय सीमा को 31 जनवरी से बढ़ाकर 31 मार्च करने की मांग की है। इस व्यवस्था को लागू करने से पूर्व व्यापारियों को जागरूक करने की मांग की है।

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